World Thyroid Day 2026: आज विश्व थायराइड जागरूकता दिवस मनाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य थायराइड रोग के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना और इसके समय पर इलाज को प्रोत्साहित करना है। हर साल 25 मई को यह दिन मनाया जाता है। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश में सामने आए नए रुझानों ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।
हिमाचल में अब पुरुषों में भी थायराइड के मामले लगातार बढ़ते दिखाई दे रहे हैं, जबकि पहले यह बीमारी मुख्य रूप से महिलाओं में अधिक पाई जाती थी।
पुरुषों में तनाव और वर्कलोड बना बड़ा कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, पुरुषों में बढ़ते वर्कलोड, तनाव और थकान थायराइड के मामलों में वृद्धि का प्रमुख कारण बन रहे हैं। यह बीमारी केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव डाल सकती है।
पहले जहां थायराइड को महिलाओं की बीमारी माना जाता था, अब इसके लक्षण पुरुषों में भी तेजी से सामने आ रहे हैं। सोलन समेत हिमाचल के कई हिस्सों में ऐसे मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, हालांकि राज्य स्तर पर इस पर कोई हालिया व्यापक अध्ययन उपलब्ध नहीं है।
महिलाओं में अब भी ज्यादा खतरा
अध्ययनों के अनुसार, थायराइड विकार भारत में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल हैं। आंकड़ों के मुताबिक, देश में लगभग हर 10 में से 1 व्यक्ति किसी न किसी थायराइड विकार से प्रभावित है।
महिलाओं में यह समस्या पुरुषों की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक पाई जाती है। खासकर गर्भावस्था के दौरान थायराइड का असर न केवल मां, बल्कि बच्चे के स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकता है।
थायराइड क्या है और क्यों होता है?
थायराइड एक हार्मोनल ग्रंथि से जुड़ी बीमारी है, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करती है। जब यह ग्रंथि अधिक या कम हार्मोन बनाती है, तो शरीर में कई तरह की समस्याएं शुरू हो जाती हैं।
इसके लक्षणों में थकान, वजन का बढ़ना या घटना, चिड़चिड़ापन, बाल झड़ना और दिल की धड़कन का असामान्य होना शामिल हो सकते हैं।
समय पर जांच और इलाज जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि थायराइड की पहचान शुरुआती चरण में हो जाए तो इसका इलाज संभव है। नियमित स्वास्थ्य जांच और लक्षणों पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।
डॉक्टरों के अनुसार, संतुलित आहार, तनाव कम करना और नियमित व्यायाम इस बीमारी के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव
विश्व थायराइड दिवस का मुख्य उद्देश्य यही है कि लोग इस बीमारी को गंभीरता से लें और समय पर जांच कराएं। हिमाचल में पुरुषों में बढ़ते मामले इस बात का संकेत हैं कि अब इस बीमारी को केवल महिलाओं तक सीमित समझना गलत हो
