कान्स फिल्म फेस्टिवल 2026 में इस साल कई सितारों के ग्लैमरस और स्टाइलिश लुक चर्चा में रहे, लेकिन फैशन डिजाइनर अंजलि फोगाट का रेड कार्पेट लुक सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन गया। अंजलि ने गोपी-प्रेरित पारंपरिक अंदाज में रेड कार्पेट पर एंट्री की, लेकिन उनके हाथ में दिखा प्रेमानंद महाराज की तस्वीर वाला बैग और कमर पर लगी राधा-कृष्ण आकृति विवाद की वजह बन गई।
स्काई ब्लू लहंगे में दिखीं अंजलि
अंजलि फोगाट ने अपने डिजाइनर लेबल का स्काई ब्लू रंग का हैवी एम्ब्रॉयडर्ड लहंगा पहना था। गोल्डन थ्रेड वर्क, बूटी डिजाइन और हैवी बॉर्डर वाले इस लहंगे को उन्होंने मैचिंग ब्लाउज और दो नेट दुपट्टों के साथ स्टाइल किया। उनका पूरा लुक ट्रेडिशनल और ड्रामेटिक दोनों का मिश्रण नजर आया।
उन्होंने कुंदन नेकपीस, बड़े झुमके, माथापट्टी, चूड़ियां और लंबी चोटी के साथ गोपी-स्टाइल को और उभारा। हाथों में आलता और बड़ी नथ ने उनके लुक को अलग पहचान दी।
बैग और कमरबंद बने विवाद की वजह
हालांकि, सबसे ज्यादा चर्चा उनके एक्सेसरीज की हुई। अंजलि ने मोतियों से सजा हुआ एक बैग कैरी किया, जिस पर प्रेमानंद महाराज की तस्वीर लगी थी और पीछे राधा रानी के 108 नाम लिखे थे। इसके अलावा उन्होंने कमर पर झूला झूलते राधा-कृष्ण की आकृति वाला मेटैलिक कमरबंद भी पहना था।
कुछ लोगों ने इसे भारतीय संस्कृति, भक्ति और आध्यात्म को अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिखाने की कोशिश बताया, जबकि कई सोशल मीडिया यूजर्स ने धार्मिक प्रतीकों को फैशन एक्सेसरी की तरह इस्तेमाल करने पर आपत्ति जताई।
सोशल मीडिया पर मिली तीखी प्रतिक्रियाएं
सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ यूजर्स ने लिखा कि धार्मिक प्रतीकों और संतों की तस्वीरों को फैशन आइटम की तरह इस्तेमाल करना उचित नहीं है। कई लोगों ने विशेष रूप से राधा-कृष्ण की आकृति को कमर के नीचे पहनने पर नाराजगी जताई।
एक यूजर ने लिखा कि “भक्ति और फैशन में फर्क समझना जरूरी है”, जबकि दूसरे ने कहा कि “सनातन संस्कृति को दिखाने के नाम पर धार्मिक भावनाओं का गलत इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।”
समर्थन में भी आए लोग
विवाद के बीच कई लोग अंजलि फोगाट के समर्थन में भी उतरे। उनका कहना है कि उन्होंने भारतीय संस्कृति और आध्यात्म को वैश्विक मंच पर गर्व के साथ प्रस्तुत किया है। समर्थकों के अनुसार, यह उनकी रचनात्मक अभिव्यक्ति का हिस्सा था और इसे गलत तरीके से नहीं देखा जाना चाहिए।
बहस का केंद्र बना फैशन और आस्था
यह मामला एक बार फिर इस बहस को सामने लाया है कि फैशन और धार्मिक प्रतीकों के बीच सीमा कहां तय होनी चाहिए। जहां कुछ लोग इसे सांस्कृतिक प्रस्तुति मान रहे हैं, वहीं अन्य इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा संवेदनशील विषय बता रहे हैं।
