Iran US Tension: करीब 40 दिनों तक चली बातचीत के बाद भी ईरान और अमेरिका के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई। इस्लामाबाद में हुई पीस बैठक से कोई हल नहीं निकला। इसके बाद हालात और ज्यादा बिगड़ गए और दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता चला गया।
होर्मुज स्ट्रेट में नाकेबंदी
बातचीत फेल होने के बाद अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट में नाकेबंदी कर दी। यह इलाका दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में गिना जाता है। ईरान समेत कई देशों ने इस फैसले का विरोध किया, लेकिन अमेरिका अपने फैसले पर कायम रहा।
ईरानी जहाज को रोका गया
अमेरिकी सेना ने अरब सागर में ईरान के झंडे वाले एक मालवाहक जहाज ‘टूस्का’ को रोक लिया। आरोप है कि यह जहाज अमेरिकी नाकेबंदी का उल्लंघन कर रहा था। यह कार्रवाई अमेरिकी केंद्रीय कमान यानी सेंटकॉम के निर्देश पर की गई।
अमेरिकी जहाज की कार्रवाई
जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना के यूएसएस स्प्राउंस नाम के युद्धपोत ने इस जहाज को रोका। यह जहाज ईरान के बंदर अब्बास की तरफ जा रहा था। अमेरिका का कहना है कि उसने नियमों के तहत कार्रवाई की है।
ईरान का पलटवार
अमेरिका की इस कार्रवाई के बाद ईरान ने भी जवाबी कदम उठाया। रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी सेना ने कुछ अमेरिकी सैन्य जहाजों पर ड्रोन से हमला किया। इससे समुद्र में तनाव और बढ़ गया है।
हालात बने गंभीर
दोनों देशों के बीच इस तरह की कार्रवाई से हालात और गंभीर होते जा रहे हैं। समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। दुनिया के कई देश इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
क्या हो सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव आगे बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक व्यापार और तेल सप्लाई पर पड़ सकता है। होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है, ऐसे में कोई भी रुकावट बड़ा संकट पैदा कर सकती है। फिलहाल दोनों देशों के बीच टकराव जारी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या दोनों देश फिर से बातचीत की राह अपनाते हैं या हालात और ज्यादा बिगड़ते हैं।
