Kerala विधानसभा चुनाव 2026 के शुरुआती रुझानों में कांग्रेस नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) बड़ी जीत की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। 140 सीटों वाली विधानसभा में UDF ने 100 सीटों का आंकड़ा पार कर लिया है, जबकि Communist Party of India (Marxist) के नेतृत्व वाला LDF 41 सीटों पर सिमटता दिख रहा है।
इन रुझानों ने यह लगभग साफ कर दिया है कि कांग्रेस की अगुवाई में UDF राज्य में सरकार बनाने जा रही है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर खड़ा हो गया है।
शशि थरूर का नाम सबसे आगे
मुख्यमंत्री पद की चर्चा में सबसे प्रमुख नाम Shashi Tharoor का है। चुनाव से पहले भले ही कांग्रेस ने किसी मुख्यमंत्री चेहरे की घोषणा नहीं की थी, लेकिन राजनीतिक गलियारों में थरूर का नाम लगातार चर्चा में रहा।
मतगणना से एक दिन पहले तिरुवनंतपुरम पहुंचे थरूर से जब मुख्यमंत्री पद को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि पार्टी की अपनी प्रक्रिया है और अंतिम फैसला हाईकमान करेगा।
केसी वेणुगोपाल की दावेदारी भी मजबूत
दूसरी तरफ K. C. Venugopal का नाम भी मजबूती से सामने आ रहा है। चुनावी रुझानों के बीच उनकी तस्वीरें और समर्थकों के जश्न ने उनकी दावेदारी को और मजबूत कर दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठन में मजबूत पकड़ होने की वजह से वेणुगोपाल भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में अहम दावेदार हैं।
वीडी सतीशन और रमेश चेन्निथला भी रेस में
मुख्यमंत्री पद की संभावित सूची में V. D. Satheesan और Ramesh Chennithala के नाम भी शामिल हैं।
वीडी सतीशन वर्तमान में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं और राज्य कांग्रेस में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। वहीं रमेश चेन्निथला का अनुभव भी उन्हें मजबूत दावेदार बनाता है।
कांग्रेस में कैसे चुना जाता है CM?
थरूर ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस में मुख्यमंत्री चयन की एक तय प्रक्रिया है। चुनाव परिणाम आने के बाद पार्टी नेतृत्व विधायकों की राय लेता है और फिर हाईकमान अंतिम निर्णय करता है।
यानी मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इसका फैसला विधायक दल की राय और केंद्रीय नेतृत्व की रणनीति पर निर्भर करेगा।
10 साल बाद सत्ता में वापसी
अगर UDF सरकार बनाती है तो यह कांग्रेस की राज्य में एक दशक बाद वापसी होगी। आखिरी बार 2016 में कांग्रेस के नेतृत्व में सरकार बनी थी, जब Oommen Chandy मुख्यमंत्री थे।
इसके बाद Pinarayi Vijayan के नेतृत्व में LDF ने लगातार दो बार सत्ता संभाली। ऐसे में यह जीत केरल की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत मानी जा रही है।
