Earth Day 2026: आज जब पूरी दुनिया आधुनिकता की अंधी दौड़ में शामिल है, प्रकृति की निरंतर अनदेखी ने धरती को विनाश के मुहाने पर ला खड़ा किया है। पर्यावरण विशेषज्ञ रावत के अनुसार, मानवीय स्वार्थ और संसाधनों के अत्यधिक दोहन ने न केवल पारिस्थितिक संतुलन बिगाड़ा है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
आंकड़े दे रहे गवाही
हालिया वैज्ञानिक शोध और आंकड़े बताते हैं कि पृथ्वी अब अपनी सहनशक्ति की सीमा पार कर रही है:
* बंजर होती जमीन: उपजाऊ भूमि का रकबा तेजी से घट रहा है और दुनिया की लगभग 40 प्रतिशत भूमि के बंजर होने का खतरा मंडरा रहा है।
* विलुप्ति का संकट: वनस्पतियों और जीव-जंतुओं की हजारों प्रजातियाँ अब इतिहास बनने की कगार पर हैं।
* जनसंख्या का दबाव: इस सदी के अंत तक विश्व की आबादी 9 अरब पार करने का अनुमान है, जिससे सीमित संसाधनों पर दबाव और बढ़ेगा।
होलोसीन से ‘एंथ्रोपोसीन’ का सफर
इतिहास में पृथ्वी साढ़े चार अरब वर्ष पुरानी है, जहाँ बदलाव की गति हमेशा धीमी रही। लेकिन पिछले कुछ दशकों में इंसानी दखल ने सब बदल दिया है:
* मानव-निर्मित युग: वैज्ञानिक अब वर्तमान काल को ‘एंथ्रोपोसीन’ कह रहे हैं, क्योंकि आज प्रकृति में होने वाले बदलावों के लिए मानवीय गतिविधियाँ (औद्योगिकीकरण, शहरीकरण) ही 90 प्रतिशत तक जिम्मेदार हैं।
* जैन दर्शन की दृष्टि: रावत ने जैन दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि पृथ्वी स्वयं एक जीव है। यदि हम इसके प्रति अहिंसक और संरक्षणवादी दृष्टिकोण नहीं अपनाते, तो हम स्वयं के विनाश का मार्ग प्रशस्त करेंगे।
विरासतें भी खतरे में
वैश्विक तापमान (Global Warming) बढ़ने का असर केवल मौसम तक सीमित नहीं है:
पिघलती बर्फ: अंटार्कटिका और हिमालय की बर्फ पिघलने की गति कई गुना बढ़ गई है, जिससे समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है।
ऐतिहासिक धरोहरें: प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के कारण ताजमहल, जैसलमेर किला, अजंता-एलोरा की गुफाएँ और धौलावीरा जैसी विश्व धरोहरों पर संकट मंडरा रहा है।
समुद्री संकट: ग्रीनहाउस गैसों के कारण समुद्र अम्लीय हो रहा है, जिससे सदी के अंत तक 40% समुद्री प्रजातियाँ समाप्त हो सकती हैं।
समय हाथ से निकल रहा है
रावत ने 2009 के संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन की याद दिलाते हुए कहा कि 16 साल पहले जो चेतावनियाँ दी गई थीं, आज हालात उससे कहीं अधिक गंभीर हैं। यदि हमने अपनी जीवनशैली में बदलाव नहीं किया और प्रकृति के साथ संतुलन नहीं बनाया, तो इस नुकसान की भरपाई असंभव होगी।
