Lifestyle News:आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लंबे समय तक बैठकर काम करना और गलत पोस्चर रखना आम बात हो गई है। इसके चलते बैक पेन और नेक पेन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। कई लोग दवाइयों, फिजियोथेरेपी और महंगे गद्दों का सहारा लेते हैं, लेकिन फिर भी पूरी राहत नहीं मिलती। ऐसे में सोशल मीडिया पर एक नया ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है ।30 दिन तक बिना तकिए के सोने का चैलेंज।
क्या है इस चैलेंज का दावा?
इस चैलेंज को अपनाने वाले लोग दावा कर रहे हैं कि सिर्फ 15 से 20 दिनों में ही उन्हें फर्क महसूस होने लगा। उनका कहना है कि सुबह उठने पर गर्दन और कमर की जकड़न कम हो गई, नींद बेहतर हो गई और शरीर का पोस्चर भी सुधरने लगा। यही वजह है कि यह तरीका लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
बिना तकिए सोने से शरीर में क्या बदलाव होते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार जब हम ऊंचे या मोटे तकिए का इस्तेमाल करते हैं तो गर्दन का एंगल बिगड़ जाता है। इससे रीढ़ की हड्डी की प्राकृतिक स्थिति प्रभावित होती है। खासकर पेट के बल सोने वालों के लिए तकिया और भी नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि यह गर्दन को पीछे की ओर धकेलता है और कमर पर दबाव बढ़ाता है।वहीं बिना तकिए के सोने से सिर और गर्दन रीढ़ की सीध में रहते हैं। इससे मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं, ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और सुबह की जकड़न में कमी आती है।
शुरुआती दिनों में हो सकती है परेशानी
हालांकि इस चैलेंज को शुरू करने के पहले कुछ दिन आसान नहीं होते। शुरुआती 3 से 7 दिनों में हल्की असहजता, गर्दन में खिंचाव या नींद में बाधा महसूस हो सकती है। लेकिन जैसे-जैसे शरीर नई आदत को अपनाता है, स्थिति बेहतर होती जाती है।
30 दिन बाद क्या कहते हैं लोग?
जो लोग इस चैलेंज को पूरा कर चुके हैं, उनका कहना है कि एक महीने बाद बैक पेन में कमी, बेहतर पोस्चर और गहरी नींद का अनुभव हुआ। हालांकि हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है। इसलिए किसी भी नए प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।
