Food Safety Act: भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने शराब निर्माता कुछ कंपनियों के खिलाफ नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। नियामक संस्था ने रम, ब्रांडी, जिन, व्हिस्की, वाइन और बीयर जैसे उत्पादों में अतिरिक्त फ्लेवर के इस्तेमाल और बोतलों पर शराब की उम्र (Age Claim) से जुड़े दावों को लेकर संबंधित कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कंपनियों से पूछा गया है कि उनके खिलाफ Food Safety and Standards Act, 2006 के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए।
अतिरिक्त फ्लेवर पर क्यों उठे सवाल?
एफएसएसएआई का कहना है कि कुछ कंपनियां निर्धारित मानकों के विपरीत शराब में अतिरिक्त फ्लेवर मिला रही हैं। इससे उत्पाद का प्राकृतिक स्वाद और सुगंध बदल सकती है। यदि किसी विशेष श्रेणी की शराब में फ्लेवर मिलाने की अनुमति नहीं है, तो ऐसा करना खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। नियामक ने स्पष्ट किया है कि कंपनियां केवल निर्धारित मानकों और लेबलिंग नियमों के अनुसार ही उत्पाद बेच सकती हैं।
‘Age Claim’ को लेकर भी जांच
कार्रवाई का दूसरा बड़ा कारण शराब की बोतलों पर किए जाने वाले ‘Aged’, ’12 Years Old’ या ’18 Years Old’ जैसे दावे हैं। FSSAI के अनुसार यदि किसी ब्लेंडेड स्पिरिट में अलग-अलग उम्र की स्पिरिट मिलाई गई है, तो उसकी उम्र का दावा सबसे कम उम्र वाली स्पिरिट के आधार पर किया जाना चाहिए। उदाहरण के लिए यदि किसी मिश्रण में 18, 12 और 8 वर्ष पुरानी स्पिरिट शामिल है, तो उसे 18 वर्ष पुराना बताना उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकता है।
फिलहाल बिक्री पर रोक नहीं
एफएसएसएआई ने अभी केवल नोटिस जारी किए हैं और कंपनियों से जवाब मांगा है। फिलहाल किसी भी शराब ब्रांड की बिक्री पर रोक लगाने या उत्पादों को बाजार से वापस मंगाने का आदेश नहीं दिया गया है। कंपनियों के जवाब और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
उपभोक्ताओं के लिए क्या है सलाह?
विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ताओं को शराब खरीदते समय बोतल पर दी गई लेबलिंग, उत्पाद की श्रेणी, फ्लेवर और Age Claim जैसी जानकारियों को ध्यान से पढ़ना चाहिए। यदि किसी उत्पाद पर भ्रामक जानकारी दी जाती है, तो यह उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन माना जा सकता है।
