मकर संक्रांति भारत में हर साल 14 जनवरी को बड़े उत्साह और उल्लास के साथ मनाई जाती है। यह त्योहार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है और नए मौसम की शुरुआत का संकेत देता है। इस दिन लोग नए कपड़े पहनते हैं, दान‑पुण्य करते हैं और पारंपरिक व्यंजन बनाते हैं।
भारत में मकर संक्रांति को अलग-अलग राज्यों में अलग नामों से मनाया जाता है। उत्तर भारत में इसे मकर संक्रांति कहा जाता है, महाराष्ट्र में संक्रांति या तिळगुळ उत्सव के रूप में, और दक्षिण भारत में पोंगल के रूप में जाना जाता है। लेकिन पूरे देश में तिल और गुड़ से बनी मिठाइयों का महत्व समान है।
तिल और गुड़ को मिलाकर बनाई गई मिठाइयाँ जैसे तिल के लड्डू और तिल का हलवा इस पर्व का अहम हिस्सा हैं। सर्दियों में ये मिठाइयाँ शरीर को गर्मी और ऊर्जा देती हैं।
घर पर तिल का हलवा बनाने की आसान विधि
सामग्री:
- तिल (सेसमीन) – 1 कप
- गुड़ – 1 कप
- घी – 2 टेबलस्पून
- इलायची पाउडर – ½ टीस्पून
- ड्राई फ्रूट्स – 2 टेबलस्पून (बादाम, किशमिश)
विधि:
सबसे पहले तिल को धीमी आंच पर हल्का भून लें। तिल को तब तक भूनें जब तक यह हल्का सुनहरा और खुशबूदार न हो जाए। इसके बाद इसे ठंडा करके और मिक्सर में दरदरा पीस लें। अब उसी कड़ाही में घी डालें और उसमें गेहूं का आटा डालकर धीमी आंच पर भूनें। आटे को तब तक भूनें जब तक उसका रंग सुनहरा हो जाए और खुशबू आने लगे। एक अलग पैन में गुड़ डालकर पिघलाएं। जब गुड़ पूरी तरह पिघल जाए, उसमें घी डालकर अच्छे से मिलाएं। अब तिल,आटा और इलायची पाउडर डालकर मिश्रण को धीमी आंच पर पकाएं। अंत में ड्राई फ्रूट्स डालें और हलवा को 5-10 मिनट तक अच्छी तरह मिलाते रहें। हलवा तैयार होने के बाद इसे गरम‑गरम सर्व करें। आप चाहें तो ऊपर से और ड्राई फ्रूट्स डालकर सजावट कर सकते हैं। यह विधि सरल है और कोई भी इसे घर पर आसानी से बना सकता है। हलवे की खुशबू और स्वाद घर को त्योहार जैसा माहौल देते हैं।
तिल हलवा: स्वाद के साथ स्वास्थ्य भी
तिल में कैल्शियम, आयरन और प्रोटीन भरपूर मात्रा में होता है। सर्दियों में शरीर को ऊर्जा और गर्मी देने के लिए तिल आधारित व्यंजन बहुत उपयोगी होते हैं। गुड़ प्राकृतिक मिठास के साथ विटामिन और मिनरल्स भी प्रदान करता है, जो पाचन और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं।
ड्राई फ्रूट्स जैसे बादाम और किशमिश मिलाने से हलवे में विटामिन‑ई और एंटीऑक्सिडेंट्स की मात्रा बढ़ जाती है। इससे हलवा सिर्फ स्वादिष्ट ही नहीं, बल्कि पोषण से भरपूर भी बन जाता है। इस वजह से मकर संक्रांति पर तिल का हलवा बनाना स्वास्थ्य और स्वाद दोनों के लिए लाभकारी माना जाता है।
त्योहार की खुशियाँ और परंपरा
मकर संक्रांति पर तिल हलवे के साथ मिठास बाँटना और “तिलगुल घ्या, गोड गोड बोला” कहना परंपरा का हिस्सा है। लोग एक-दूसरे को लड्डू और हलवा बाँटकर अपने बीच प्रेम और मिठास साझा करते हैं। यह परंपरा सिर्फ खाने तक सीमित नहीं है, बल्कि रिश्तों और सांस्कृतिक अनुभव को भी मजबूत बनाती है।
घर में हलवा बनाना और इसे परिवार के साथ साझा करना बच्चों और बड़ों के लिए त्योहार की असली खुशी बन जाता है। पूरे देश में लोग पतंग उड़ाते हैं, नए पकवान बनाते हैं और अपने परिवार के साथ समय बिताते हैं। इस तरह तिल का हलवा मकर संक्रांति का स्वादिष्ट और पारंपरिक प्रतीक बन जाता है।
मकर संक्रांति का त्योहार न सिर्फ नए मौसम का स्वागत है, बल्कि यह स्वाद, परंपरा और स्वास्थ्य का उत्सव भी है। घर पर तिल का हलवा बनाकर इसे और भी खास बनाया जा सकता है। इस त्योहार पर हलवे के साथ अपने परिवार और दोस्तों में मिठास बाँटना इसे यादगार बनाता है।
