Smartphone Ban In School:आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन बच्चों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। पढ़ाई से लेकर मनोरंजन तक, मोबाइल का उपयोग तेजी से बढ़ा है। लेकिन अब सवाल उठने लगा है कि क्या स्कूलों में स्मार्टफोन का इस्तेमाल छात्रों के लिए नुकसानदेह साबित हो रहा है? हाल ही में आई कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स और सर्वे इस मुद्दे पर नई बहस को जन्म दे रहे हैं।
सर्वे में सामने आए चौंकाने वाले बदलाव
हंगरी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन में 1,198 सेकेंडरी स्कूल शिक्षकों से बातचीत की गई। इसमें पाया गया कि स्कूलों में मोबाइल, टैबलेट और स्मार्टवॉच जैसे उपकरणों पर पाबंदी लगाने के बाद छात्रों का फोन इस्तेमाल काफी कम हो गया। पहले जहां 37% छात्र स्कूल के दौरान बार-बार मोबाइल इस्तेमाल करते थे, वहीं प्रतिबंध के बाद यह आंकड़ा घटकर सिर्फ 4% रह गया।शिक्षकों ने यह भी बताया कि बच्चों में आमने-सामने बातचीत बढ़ी, आउटडोर गतिविधियों में रुचि आई और शतरंज जैसे खेलों में भागीदारी बढ़ी। कई छात्रों में ध्यान और क्लास में सहभागिता में भी सुधार देखा गया।
व्यवहार में सुधार
हालांकि पढ़ाई के नतीजों में बड़ा बदलाव हर जगह नहीं देखा गया। लगभग 64% शिक्षकों ने कहा कि अकादमिक प्रदर्शन में खास फर्क नहीं पड़ा। कुछ मामलों में छात्रों ने स्कूल में फोन न मिलने की भरपाई घर पर ज्यादा समय मोबाइल चलाकर की।फिर भी विशेषज्ञ मानते हैं कि व्यवहार और मानसिक संतुलन के स्तर पर फोन बैन के सकारात्मक संकेत जरूर मिले हैं।
दुनिया के कई देशों में लागू हैं नियम
रिपोर्ट्स के अनुसार दुनिया के करीब 58% देशों में स्कूलों में स्मार्टफोन के इस्तेमाल को लेकर किसी न किसी प्रकार के नियम लागू हैं। यूरोप और सेंट्रल एशिया में यह आंकड़ा 86% तक पहुंच चुका है। फ्रांस, चीन, कनाडा, डेनमार्क, स्वीडन और इंग्लैंड जैसे देशों में पहले से ही स्कूलों में मोबाइल इस्तेमाल पर सख्ती लागू है।
संतुलित नीति ही हो सकती है बेहतर समाधान
विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों में स्मार्टफोन के उपयोग को पूरी तरह बंद करने के बजाय संतुलित नियम बनाना ज्यादा प्रभावी हो सकता है। इससे छात्र पढ़ाई पर ध्यान भी दे पाएंगे और डिजिटल युग की जरूरी स्किल्स भी सीखते रहेंगे।
