सर्दियों में गुनगुना पानी पीना शरीर के लिए मददगार हो सकता है, लेकिन डॉक्टर साफ कहते हैं—ये कोई जादू नहीं, बस सही तरीके से, सही तापमान पर और संतुलित मात्रा में पिएं। यानी न तो बर्फ जैसा ठंडा पानी ज़रूरी है, न खौलता हुआ गर्म, बल्कि हल्का गुनगुना पानी जो शरीर को आराम से सूट करे।
डॉक्टर क्यों कहते हैं गुनगुना पानी पिएं?
अधिकतर इंटरनल मेडिसिन और गैस्ट्रो के डॉक्टर मानते हैं कि सर्दियों में लोग कम पानी पीते हैं, ऐसे में गुनगुना पानी हाइड्रेशन बनाए रखने का आसान तरीका बन जाता है।
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डाइजेशन में मदद: गर्म या गुनगुना पानी आंतों की मांसपेशियों को रिलैक्स करता है और पाचन की प्रक्रिया को स्मूथ बनाता है, इसलिए कब्ज की प्रवृत्ति वाले मरीजों को सुबह-सुबह एक–दो गिलास गुनगुना पानी लेने की सलाह दी जाती है।
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ठंड में शरीर को गर्माहट: रिसर्च बताती है कि गर्म पेय पदार्थ शरीर को भीतर से गर्म महसूस कराते हैं और शivering कम कर सकते हैं, खासकर जब बाहर बहुत ठंड हो।
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सांस की दिक्कत व जुकाम में राहत: हल्का गर्म पानी गले की म्यूकस मेम्ब्रेन को आराम देता है, कफ को ढीला करता है और बंद नाक में भी हल्की राहत दे सकता है, इसलिए सर्दी-जुकाम के मरीजों को डॉक्टर अक्सर गर्म तरल पदार्थ (सूप, काढ़ा, गुनगुना पानी) की सलाह देते हैं।
किन लोगों के लिए ज़्यादा फायदेमंद?
सर्दियों में डॉक्टर कुछ खास ग्रुप्स को गुनगुना पानी रेगुलर हैबिट बनाने की सलाह देते हैं।
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जिनको बार-बार कब्ज, पेट फूलना, या गैस की समस्या रहती है।
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जिनको ठंड ज़्यादा लगती है, खासकर बुजुर्ग, कम वजन वाले लोग या थायरॉइड/ब्लड सर्कुलेशन की दिक्कत वाले।
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दमा, एलर्जी या बार-बार गला खराब होने वाले मरीज, जिन्हें ठंडे पेय से लक्षण बढ़ते हैं।
ऐसे मरीजों को डॉक्टर अक्सर ठंडा पानी सीधे फ्रिज से लेने से बचने और कमरे के तापमान या हल्के गुनगुने पानी पर शिफ्ट होने की सलाह देते हैं।
कितना और कैसे पिएं?
सामान्य वयस्क के लिए दिनभर में कुल 2–2.5 लीटर फ्लुइड (खाने समेत) की जरूरत मानी जाती है, जो मौसम और एक्टिविटी के हिसाब से थोड़ा ऊपर-नीचे हो सकती है।
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सुबह उठकर खाली पेट 1 गिलास गुनगुना पानी, चाहें तो उसमें थोड़ा नींबू या अदरक डाल सकते हैं (अगर एसिडिटी न हो)।
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दिनभर में छोटे-छोटे घूंटों में पानी, न कि एक साथ बहुत ज्यादा; यह किडनी और दिल दोनों के लिए बैलेंस्ड रहता है।
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चाय–कॉफी को पानी का सीधा विकल्प मत मानें, क्योंकि इनमें कैफीन होता है जो हल्का डिहाइड्रेट भी कर सकता है।
ज्यादा गर्म पानी से क्या नुकसान हो सकता है?
डॉक्टर खास तौर पर चेतावनी देते हैं कि “गुनगुना” और “बहुत गर्म” दो अलग चीजें हैं। WHO और कई रिसर्च के अनुसार, 65 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान वाले पेय लंबे समय तक लगातार लेने पर इसोफेगल (भोजन नली) कैंसर का रिस्क बढ़ा सकते हैं, क्योंकि बार-बार की गर्माहट उसकी लाइनिंग को जला और नुकसान पहुंचा सकती है।
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बहुत गर्म पानी जीभ, मुंह और गले की म्यूकस मेम्ब्रेन को जला सकता है—डॉक्टर आमतौर पर कहते हैं कि अगर घूंट लेते समय जलन महसूस हो रही है तो तापमान ज्यादा है, उसे थोड़ा ठंडा होने दें।
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गैस्ट्रिक के मरीजों में बहुत गर्म तरल कभी-कभी एसिडिटी की फीलिंग बढ़ा सकते हैं, इसलिए इन्हें मध्यम तापमान पर ही रखना बेहतर है।
किन मामलों में डॉक्टर गुनगुने पानी से भी सावधान रहने को कहते हैं?
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किडनी या हार्ट फेल्योर वाले: इनके लिए कुल फ्लुइड लिमिट डॉक्टर तय करते हैं, चाहे वह ठंडा हो या गर्म; बिना सलाह के बहुत ज्यादा पानी पीना खतरनाक हो सकता है।
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कुछ दवाएं या मेडिकल कंडीशन: जैसे गंभीर GERD, कुछ ऑटोइम्यून डिसऑर्डर में खाने–पीने का तापमान भी डॉक्टर स्पेसिफिकली गाइड करते हैं, ऐसे में सामान्य सलाह की बजाय अपने ट्रीटिंग फिजिशियन की बात मानना ज़रूरी है।
