Rajasthan News: जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल की 9 वर्षीय छात्रा अमायरा की मौत का मामला एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में सामने आए CCTV फुटेज ने इस दुखद घटना से पहले के कुछ अहम पल दिखाए हैं। वीडियो सामने आने के बाद परिवार ने दावा किया है कि उनकी बेटी लगातार बुलिंग का शिकार हो रही थी और उसने कई बार मदद मांगने की कोशिश की, लेकिन उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया।
CCTV फुटेज में क्या दिखाई दिया?
परिवार की ओर से जारी वीडियो के अनुसार, अमायरा शुरुआत में सामान्य तरीके से क्लास में प्रवेश करती है और अपने दोस्तों से मिलती है। कुछ समय बाद वह डांस एक्टिविटी में भी हिस्सा लेती दिखाई देती है। इसके बाद कुछ छात्र क्लास में एक डिजिटल स्लेट लेकर आते हैं।परिवार का आरोप है कि इसी दौरान कुछ बच्चों ने उस स्लेट के जरिए अमायरा को बार-बार कुछ दिखाया, जिससे वह असहज और परेशान हो गई। वीडियो में उसकी बॉडी लैंग्वेज भी बदलती नजर आती है और वह कई बार अपनी क्लास टीचर के पास जाकर कुछ समझाने की कोशिश करती दिखाई देती है।
परिवार ने लगाए गंभीर आरोप
अमायरा के माता-पिता का कहना है कि उनकी बेटी लगातार मदद मांग रही थी, लेकिन उसकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया। उनका आरोप है कि टीचर ने उसे अलग से सुनने के बजाय अन्य छात्रों की बातों में ही व्यस्त रहीं।वीडियो में अमायरा को हाथ जोड़ते, सिर पकड़ते और परेशान हालत में कई बार टीचर के पास जाते हुए देखा जा सकता है। परिवार का कहना है कि यह साफ दिखाता है कि बच्ची मानसिक दबाव में थी।
क्लास से निकलने के बाद क्या हुआ?
फुटेज के मुताबिक, कुछ देर बाद अमायरा अकेले क्लास से बाहर निकल जाती है। परिवार का आरोप है कि जब वह चौथी मंजिल की ओर जा रही थी, तब किसी शिक्षक या स्टाफ सदस्य ने उसे रोकने या उसके पीछे जाने की कोशिश नहीं की।बाद में वह स्कूल की चौथी मंजिल से नीचे गिर गई। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
परिवार की मांग क्या है?
अमायरा के परिवार ने इस मामले में क्लास टीचर, स्कूल प्रिंसिपल और चेयरमैन के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस (JJ) एक्ट की धाराएं जोड़ने और सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने पुलिस जांच की रफ्तार पर भी सवाल उठाए हैं।फिलहाल मामले की जांच जारी है। इस घटना ने एक बार फिर स्कूलों में बुलिंग रोकने, बच्चों की शिकायतों को गंभीरता से सुनने और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की जरूरत पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में किस स्तर पर लापरवाही हुई और जिम्मेदारी किसकी बनती है।
