Europe Heatwave: यूरोप इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी और इटली जैसे कई देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। ऐसी स्थिति में एयर कंडीशनर और कूलिंग उपकरणों की मांग अचानक बढ़ गई है। जिन देशों में पहले AC लगवाने का चलन कम था, वहां अब दुकानों पर इसकी कमी तक देखने को मिल रही है।
यूरोप में क्यों नहीं होते ज्यादातर घरों में AC?
भारत के मुकाबले यूरोप का मौसम लंबे समय तक ठंडा रहता है। इसी वजह से वहां पारंपरिक रूप से अधिकांश घरों में एयर कंडीशनर लगाने की जरूरत महसूस नहीं होती थी। अनुमान है कि करीब 80% यूरोपीय घरों में पहले से AC मौजूद नहीं है। लेकिन लगातार बढ़ती गर्मी और हीटवेव ने लोगों की सोच बदल दी है।
AC खरीदने और लगवाने में कितना आता है खर्च?
यूरोप में स्प्लिट एयर कंडीशनर खरीदने और इंस्टॉल कराने का कुल खर्च लगभग €1000 से €3000 तक पहुंच जाता है। भारतीय रुपये में यह रकम करीब 90 हजार से 2.7 लाख रुपये के बराबर है।दिलचस्प बात यह है कि कई मामलों में इंस्टॉलेशन का खर्च ही एयर कंडीशनर की कीमत के बराबर या उससे भी ज्यादा हो सकता है। यही वजह है कि कई लोग AC खरीदने से पहले कई बार सोचते हैं।
इंस्टॉलेशन इतना महंगा क्यों है?
जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों में एयर कंडीशनर लगाने के लिए केवल सरकार से प्रमाणित F-Gas इंजीनियर ही अधिकृत होते हैं। आम मैकेनिक या घर का मालिक खुद AC इंस्टॉल नहीं कर सकता। सख्त नियमों और महंगी लेबर कॉस्ट के कारण इंस्टॉलेशन की कीमत काफी बढ़ जाती है।
पोर्टेबल AC बन रहे हैं पहली पसंद
महंगे इंस्टॉलेशन से बचने के लिए कई लोग अब पोर्टेबल एयर कंडीशनर खरीद रहे हैं। इनकी कीमत लगभग €300 से €700 के बीच होती है। इन्हें लगाने के लिए दीवार में ड्रिलिंग या किसी विशेष तकनीकी प्रक्रिया की जरूरत नहीं पड़ती, इसलिए यह अपेक्षाकृत सस्ता विकल्प माना जा रहा है।
AC लगाने के लिए लेनी पड़ती है मंजूरी
पेरिस और रोम जैसे शहरों में घर के बाहर AC की आउटडोर यूनिट लगाने से पहले स्थानीय प्रशासन और हाउसिंग एसोसिएशन की अनुमति लेनी पड़ सकती है। वहीं किराए के मकान में रहने वाले लोगों को मकान मालिक की मंजूरी के बिना फिक्स्ड AC लगाने की इजाजत नहीं होती।
बिजली का बिल भी बढ़ाता है चिंता
सिर्फ AC खरीदना ही महंगा नहीं है, बल्कि उसे चलाना भी आसान नहीं। यूरोप में बिजली की कीमत दुनिया के सबसे महंगे देशों में गिनी जाती है। ऐसे में लोग AC का इस्तेमाल सोच-समझकर करते हैं ताकि बिजली का बिल जरूरत से ज्यादा न बढ़ जाए। लगातार बढ़ती हीटवेव के बीच यूरोप अब कूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर नई चुनौतियों का सामना कर रहा है।
