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“असत्य कितना भी शक्तिशाली हो, जीत सत्य की होती है, ”सोमनाथ अमृत महोत्सव में गूंजा पीएम मोदी का संबोधन

Somnath Amrit Mahotsav: गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर में सोमवार को भक्ति, आस्था और इतिहास का अद्भुत संगम देखने को मिला। सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 साल पूरे होने पर आयोजित “सोमनाथ अमृत महोत्सव” में प्रधानमंत्री Narendra Modi शामिल हुए और देशवासियों को बड़ा संदेश दिया।पीएम मोदी ने कहा, “असत्य कितना भी ताकतवर क्यों न दिखे, अंत में जीत हमेशा सत्य की ही होती है।” उनके इस बयान पर मंदिर परिसर तालियों और हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा।

भक्तिमय माहौल में हुआ विशेष आयोजन

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महोत्सव के दौरान मंदिर को बेहद आकर्षक तरीके से सजाया गया था। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी थी। देश के 11 पवित्र तीर्थों से लाए गए जल से विशेष कुंभाभिषेक किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों ने पूरे माहौल को आध्यात्मिक बना दिया।समुद्र किनारे स्थित सोमनाथ मंदिर की भव्यता इस अवसर पर और भी खास नजर आई। श्रद्धालुओं के चेहरों पर उत्साह और गर्व साफ दिखाई दे रहा था।

“सोमनाथ सिर्फ मंदिर नहीं, विश्वास की ताकत है”

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि सोमनाथ केवल पत्थरों से बना मंदिर नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, आस्था और आत्मविश्वास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सदियों तक आक्रमणों और विनाश का सामना करने के बावजूद यह मंदिर हर बार फिर से खड़ा हुआ।उन्होंने कहा, “सोमनाथ हमें सिखाता है कि कठिन से कठिन समय में भी अपनी पहचान और विश्वास को बचाए रखना ही असली ताकत है।”

संघर्ष और पुनर्निर्माण की कहानी

इतिहास में सोमनाथ मंदिर को कई बार तोड़ा गया। 1026 में महमूद गजनवी ने यहां हमला कर भारी लूटपाट की थी। बाद में भी कई आक्रमणकारियों ने मंदिर को नुकसान पहुंचाया, लेकिन लोगों की आस्था कभी नहीं टूटी।हर बार मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ और यही इसकी सबसे बड़ी पहचान बन गई। इसलिए सोमनाथ को केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत के स्वाभिमान का प्रतीक भी माना जाता है।

सरदार पटेल का सपना बना नई पहचान

आजादी के बाद Sardar Vallabhbhai Patel ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था। उनके प्रयासों से मंदिर को नया स्वरूप मिला।11 मई 1951 को तत्कालीन राष्ट्रपति Rajendra Prasad ने यहां ज्योतिर्लिंग की प्राण प्रतिष्ठा की थी।आज सोमनाथ मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और अटूट विश्वास की जीवंत पहचान बन चुका है।

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