Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले का फुरसतगंज कस्बा कभी रायबरेली का हिस्सा हुआ करता था। करीब 2002 से यहां एक के बाद एक रहस्यमय हत्याएं शुरू हुईं। सबसे हैरानी वाली बात यह थी कि हर वारदात का तरीका लगभग बिल्कुल एक जैसा था।
कातिल केवल 45 साल से अधिक उम्र के पुरुषों को निशाना बनाता था। ज्यादातर लोग घर के बाहर बरामदे में सो रहे होते थे या रात में खेतों से अकेले लौट रहे होते थे। उनके सीने में सिर्फ एक गोली मारी जाती थी। न हाथापाई के निशान मिलते थे और न ही लूट का कोई मकसद नजर आता था।
मृतकों की जेब में रखे पैसे भी सुरक्षित मिलते थे। यही वजह थी कि पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल था कि आखिर इन अनजान लोगों को कौन और क्यों मार रहा है?
दो साल तक पुलिस के लिए बना रहा रहस्य
लगातार हो रही वारदातों से इलाके में डर का माहौल बन गया। पुलिस ने फुरसतगंज में चौकी स्थापित की और मामले की जांच तेज की। गोलियों की जांच में पता चला कि वारदातों में देसी कारतूस का इस्तेमाल किया गया था।
तत्कालीन लखनऊ जोन के आईजी सुलखान सिंह ने मामले को गंभीरता से लिया। इसके बाद स्पेशल टास्क फोर्स बनाई गई और सादी वर्दी में पुलिसकर्मियों को इलाके में तैनात किया गया। पुलिस उन लोगों पर नजर रखने लगी जो रात में सुनसान रास्तों और पगडंडियों पर घूमते थे।
57 साल के सदाशिव साहू पर गया शक
आखिरकार पुलिस की नजर एक अधेड़ व्यक्ति पर गई, जिसका नाम सदाशिव साहू था। वह फुरसतगंज में कपड़े की दुकान चलाता था। दिसंबर 2004 में पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया।
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान साहू ने 22 लोगों की हत्या करने की बात कबूल की। जांच के अनुसार उसकी पहली वारदात अप्रैल 2002 और आखिरी हत्या नवंबर 2004 में हुई थी।
हत्या के बाद मिलती थी अजीब शांति
पुलिस के मुताबिक, साहू ने अपने कबूलनामे में दावा किया कि उसे किसी अदृश्य शक्ति से लोगों की हत्या करने के लिए प्रेरणा मिलती थी। हत्या के बाद उसे एक अजीब तरह की शांति महसूस होती थी।
वह कथित तौर पर पहले अपने शिकार से सामान्य बातचीत करता और फिर बेहद करीब जाकर गोली मार देता था। इससे गोली की आवाज दब जाती थी और पीड़ित की मौके पर ही मौत हो जाती थी।
पुलिस को उसके घर से नकली दाढ़ी-मूंछ, सफेद कपड़े और रबर के तलवे वाले जूते भी मिले। इन सामानों ने जांच को और गंभीर बना दिया। करीब दो साल तक जारी रहे इस हत्याकांड के सिलसिले का अंत आखिरकार आरोपी की गिरफ्तारी के साथ हुआ।
