PGI Spine Surgery: रीढ़ की गंभीर चोटों के इलाज के लिए अब मरीजों को बड़े शहरों के महंगे अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा। Sanjay Gandhi Postgraduate Institute of Medical Sciences के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में पहली बार अत्याधुनिक ओ-आर्म तकनीक की मदद से रीढ़ की सफल सर्जरी की गई है। इस सफलता के बाद मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर और आधुनिक इलाज मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
कानपुर के युवक की सफल सर्जरी
यह ऑपरेशन कानपुर के 32 वर्षीय युवक पर किया गया, जिसे फैक्ट्री में काम के दौरान गिरने से रीढ़ की हड्डी के D-10 हिस्से में गंभीर फ्रैक्चर हो गया था। हालत गंभीर होने पर उसे पीजीआई लाया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने तुरंत सर्जरी करने का फैसला लिया। ऑपरेशन को एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के प्रमुख डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव के निर्देशन में अंजाम दिया गया।
ओ-आर्म तकनीक ने बदली सर्जरी की तस्वीर
न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉ. आशुतोष कुमार ने बताया कि ओ-आर्म तकनीक ऑपरेशन के दौरान रीढ़ की हड्डी की थ्री-डी (3D) इमेज तुरंत उपलब्ध कराती है। इससे डॉक्टर स्क्रू और इम्प्लांट को बिल्कुल सही जगह पर लगाने में सक्षम होते हैं। पहले जहां बड़े चीरे की जरूरत पड़ती थी, अब छोटे चीरे से ही सर्जरी संभव हो रही है। इससे मरीज को कम दर्द होता है, खून का नुकसान भी कम होता है और रिकवरी तेजी से होती है।
कम खर्च में बेहतर इलाज
इस तकनीक की एक बड़ी खासियत यह भी है कि यह निजी अस्पतालों की तुलना में काफी सस्ती है। पीजीआई में इस पूरी सर्जरी का खर्च इम्प्लांट सहित लगभग डेढ़ लाख रुपये आता है, जबकि निजी अस्पतालों में यही इलाज पांच लाख रुपये तक पहुंच सकता है। इससे आम मरीजों को बड़ी आर्थिक राहत मिलती है।
विशेषज्ञ टीम की अहम भूमिका
इस सफल ऑपरेशन में डॉ. पवन वर्मा, डॉ. वेद प्रकाश, डॉ. सौमेन कांजीलाल, डॉ. श्रेयश राय सहित एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. वंश और डॉ. प्रतीक बैस समेत कई डॉक्टरों ने सहयोग किया। पूरी टीम के प्रयासों की सराहना की जा रही है।
पीजीआई के लिए बड़ी उपलब्धि
पीजीआई के निदेशक डॉ. आरके धीमान ने इस सफलता को संस्थान के लिए बड़ी उपलब्धि बताया और पूरी टीम को बधाई दी। विशेषज्ञों का मानना है कि ओ-आर्म तकनीक आने वाले समय में रीढ़ की सर्जरी को और भी सुरक्षित और आम मरीजों के लिए सुलभ बनाएगी।
