Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश को ‘उद्यम प्रदेश’ बनाने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संकल्प को निजी क्षेत्र के बैंकों से झटका लगता दिख रहा है। प्रदेश सरकार की शीर्ष प्राथमिकता वाली ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ योजना के तहत बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया है, लेकिन निजी बैंक इसमें रुचि नहीं दिखा रहे हैं। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इन बैंकों का प्रदर्शन इतना निराशाजनक है कि अब मुख्य सचिव स्तर पर इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
क्या है योजना और लक्ष्य?
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए प्रदेश सरकार ने 1.5 लाख युवाओं को बैंकों के माध्यम से ऋण दिलाकर उद्यमी बनाने का लक्ष्य रखा है। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ऋण की मार्जिन मनी और ब्याज का पूरा बोझ प्रदेश सरकार खुद उठाती है, ताकि युवाओं पर कर्ज अदायगी का अतिरिक्त भार न पड़े। अब तक कुल 1,30,362 युवाओं को ऋण दिया जा चुका है, जिसमें सरकारी बैंकों की भूमिका सराहनीय रही है।
सरकारी बैंकों का ‘धमाका’
आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि राष्ट्रीयकृत (सरकारी) बैंकों ने सरकार के लक्ष्य को न केवल छुआ है, बल्कि उससे कहीं आगे निकल गए हैं।
* बैंक ऑफ इंडिया: 140.21% (सबसे आगे)
* बैंक ऑफ बड़ौदा: 138.76%
* स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI): 129.09%
* पंजाब नेशनल बैंक (PNB): 108.86%
इसके विपरीत, निजी क्षेत्र के दिग्गजों की स्थिति चिंताजनक है:
* IDBI बैंक: 39.23%
* HDFC बैंक: 20.26%
* ICICI बैंक: मात्र 9.89%
* एक्सिस बैंक: 8.08%
* इंडसइंड और बंधन बैंक: 1% से भी कम
असहयोग किया तो सरकारी पैसा वापस लेंगे
पिछले दिनों स्टेट लेवल बैंकर्स समिति (SLBC) की बैठक में मुख्य सचिव ने निजी बैंकों के इस रवैये पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। बैठक में यह स्पष्ट चेतावनी दी गई कि यदि निजी बैंक युवाओं को ऋण देने में इसी तरह कतराते रहे, तो शासन इन बैंकों में जमा होने वाली भारी-भरकम सरकारी धनराशि (Government Deposits) को निकालने या भविष्य में जमा करने पर रोक लगाने का आदेश जारी कर सकता है।
