Auto News: भारत में इलेक्ट्रिक कारों (EV) की मांग अचानक तेज़ी से बढ़ने लगी है। इसकी सबसे बड़ी वजह पर्यावरण नहीं, बल्कि बढ़ती ईंधन कीमतें बन गई हैं। पेट्रोल और डीजल के लगातार बढ़ते दामों ने आम लोगों के मासिक बजट पर बड़ा असर डाला है। ऐसे में अब बड़ी संख्या में ग्राहक इलेक्ट्रिक कारों की ओर रुख कर रहे हैं, जिसके चलते कई शोरूम्स में वेटिंग भी शुरू हो गई है।
पेट्रोल-डीजल की महंगाई ने बदला ग्राहकों का मूड
पिछले कुछ हफ्तों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है। जो लोग रोज़ाना लंबी दूरी तय करते हैं, उनके लिए ईंधन का खर्च काफी बढ़ गया है। ऐसे में लोग अब ऐसी गाड़ियों की तलाश में हैं जिनका रनिंग कॉस्ट कम हो।
छोटी इलेक्ट्रिक कारों की डिमांड में जबरदस्त उछाल
ऑटो इंडस्ट्री के आंकड़े बताते हैं कि सबसे ज्यादा मांग 15 लाख रुपये से कम कीमत वाली इलेक्ट्रिक कारों की बढ़ी है। यह वह ग्राहक वर्ग है जो हर महीने के खर्चों का हिसाब-किताब बहुत ध्यान से रखता है। पेट्रोल कार की तुलना में इलेक्ट्रिक कार चलाने का खर्च काफी कम पड़ता है। घर पर चार्जिंग की सुविधा होने पर प्रति किलोमीटर खर्च और भी कम हो जाता है, जिससे लंबे समय में अच्छी बचत संभव है।
बुकिंग आंकड़े दे रहे बड़े बदलाव के संकेत
कार कंपनियों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में इलेक्ट्रिक वाहनों की बुकिंग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। कई लोकप्रिय मॉडल्स के लिए ग्राहकों को पहले से बुकिंग करानी पड़ रही है। कुछ शहरों में तो डिलीवरी के लिए वेटिंग पीरियड भी बढ़ने लगा है। यह संकेत है कि अब ईवी केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि मुख्यधारा की पसंद बनती जा रही हैं।
सब्सिडी से ज्यादा असर ईंधन खर्च का
सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं और सब्सिडी दीं, लेकिन मांग में इतना बड़ा बदलाव नहीं दिखा। अब जब पेट्रोल और डीजल का खर्च लगातार बढ़ रहा है, तो लोग खुद ही ईवी की ओर आकर्षित हो रहे हैं। ग्राहक समझ रहे हैं कि गाड़ी खरीदते समय मिलने वाली छूट एक बार का फायदा है, जबकि कम रनिंग कॉस्ट हर महीने बचत कराती है।
कंपनियों के सामने नई चुनौती
बढ़ती मांग के बीच अब सबसे बड़ी चुनौती सप्लाई की है। वाहन निर्माता कंपनियां उत्पादन बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं ताकि ग्राहकों को लंबा इंतजार न करना पड़े। यदि कंपनियां समय पर पर्याप्त गाड़ियां उपलब्ध करा पाती हैं, तो आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ सकती है।
