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ASICS Shoes Case: एक महीने में खराब हुए हज़ारों रुपये के जूते, कोर्ट ने कम्पनी पर लगाया लाखों का जुर्माना

ASICS Shoes Case: महंगे और नामी ब्रांड के जूते खरीदते समय ज्यादातर लोग बेहतर गुणवत्ता और लंबी उम्र की उम्मीद करते हैं। लेकिन अगर वही जूते कुछ ही दिनों में खराब हो जाएं और कंपनी शिकायत के बावजूद जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दे, तो उपभोक्ता के अधिकार क्या कहते हैं? ऐसा ही एक मामला सामने आने के बाद चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने स्पोर्ट्स फुटवियर कंपनी ASICS India को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी ठहराया है।

क्या है पूरा मामला?

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चंडीगढ़ निवासी अजय मलिक ने ASICS के रनिंग शूज़ 6,499 रुपये में खरीदे थे। लेकिन खरीदारी के करीब एक महीने के भीतर ही जूतों का सोल एड़ी और किनारों से उखड़ने लगा। इसके चलते चलने और दौड़ने में उन्हें परेशानी होने लगी।

समस्या सामने आने पर अजय मलिक कंपनी के स्टोर पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई। शुरुआत में स्टोर ने उनकी शिकायत स्वीकार करते हुए एक्सचेंज प्रक्रिया शुरू की और उनसे एक्सचेंज फॉर्म पर हस्ताक्षर भी करवा लिए। हालांकि, बाद में कंपनी ने जूते बदलने या पैसे वापस करने से इनकार कर दिया और केवल क्रेडिट वाउचर देने का प्रस्ताव रखा।

कंपनी ने कोर्ट में क्या दलील दी?

मामला उपभोक्ता आयोग पहुंचने पर ASICS India ने अपने बचाव में कहा कि जूतों में किसी प्रकार की निर्माण संबंधी खराबी नहीं थी। कंपनी का दावा था कि उत्पाद पूरी तरह सही था और शिकायत उचित नहीं थी।

आयोग ने ग्राहक के पक्ष में क्यों सुनाया फैसला?

उपभोक्ता आयोग ने सुनवाई के दौरान कंपनी से सवाल किया कि यदि जूतों में कोई खराबी नहीं थी, तो शिकायत स्वीकार कर एक्सचेंज फॉर्म पर हस्ताक्षर क्यों करवाए गए?

आयोग ने कहा कि जब कोई ग्राहक किसी प्रतिष्ठित ब्रांड के उत्पाद पर अच्छी-खासी रकम खर्च करता है, तो उसे उच्च गुणवत्ता मिलने की उचित उम्मीद होती है। ऐसे में महज एक महीने के भीतर जूतों का खराब हो जाना सेवा में कमी और गुणवत्ता संबंधी लापरवाही को दर्शाता है।

कोर्ट का फैसला

आयोग ने ASICS India को निर्देश दिया कि वह ग्राहक को जूतों की पूरी कीमत 6,499 रुपये वापस करे। इसके अलावा खरीदारी की तारीख से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी अदा किया जाए।

साथ ही मानसिक पीड़ा और मुकदमेबाजी के खर्च को देखते हुए आयोग ने कंपनी को 10,000 रुपये अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पूरी राशि का भुगतान कंपनी को 60 दिनों के भीतर करना होगा।

 

 

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