Viral News: दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों की मांगों को लेकर भूख हड़ताल करने वाले सोनम वांगचुक ने पहली बार खुलकर बताया है कि आखिर उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग क्यों छोड़ दी। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि यह फैसला उन्होंने किसी दबाव में नहीं, बल्कि आंदोलन और छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए लिया।
पहली वजह- आंदोलन में इस्तीफे की मांग पहले से ही उठ रही थी
सोनम वांगचुक ने बताया कि जब उन्होंने देखा कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) पहले से ही धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को प्रमुखता से उठा रही है, तब उन्हें लगा कि उन्हें अपनी ऊर्जा बाकी जरूरी मांगों पर लगानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना थी कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न हो और उन्हें न्याय मिले। इसी कारण उन्होंने सरकार से लिखित आश्वासन लेने पर ज्यादा जोर दिया।
दूसरी वजह- माहौल बिगड़ने का था डर
वांगचुक ने बताया कि 23 जुलाई की रात उन्हें माहौल तेजी से बदलता नजर आया। सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं और सुरक्षा व्यवस्था भी लगातार बढ़ाई जा रही थी। उन्हें आशंका हुई कि यदि तनाव बढ़ा तो आंदोलन के दौरान कोई बड़ी अप्रिय घटना हो सकती है।
उनके मुताबिक उन्हें पिछले साल लेह की घटना भी याद आ गई, जहां हालात काफी गंभीर हो गए थे। इसी अनुभव ने उन्हें यह फैसला लेने के लिए प्रेरित किया कि टकराव बढ़ाने के बजाय बाकी दो महत्वपूर्ण मांगों पर सहमति हासिल करना ज्यादा जरूरी है।
सरकार से मिली इन दो मांगों पर सहमति
सोनम वांगचुक ने बताया कि सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बाद दो अहम मुद्दों पर सकारात्मक रुख सामने आया। इनमें छात्रों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का भरोसा और प्रभावित छात्रों को मुआवजा देने का आश्वासन शामिल था। उन्होंने कहा कि उन्होंने इन मांगों पर लिखित भरोसा लेने की कोशिश की ताकि भविष्य में छात्रों के हित सुरक्षित रह सकें।
आंदोलन से ज्यादा अहम थी छात्रों की सुरक्षा
वांगचुक का कहना है कि किसी भी आंदोलन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी उसमें शामिल लोगों की सुरक्षा होती है। उनका मानना है कि यदि आंदोलन हिंसक या अनियंत्रित हो जाता, तो सबसे ज्यादा नुकसान छात्रों को ही उठाना पड़ता। इसी सोच के साथ उन्होंने इस्तीफे की मांग छोड़कर बाकी मुद्दों पर समाधान को प्राथमिकता दी।
