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इंसानियत की मिसाल बना टैक्सी ड्राइवर, गोल्ड मेडल विजेता छात्रा ने लौटाया ऐसा एहसान कि लोग हुए भावुक

Taxi driver wearing protective medical mask ffp3 respirator and disposable gloves in his car. Safe public transport during coronavirus COVID-19 pandemic. Flat Vector illustration

Viral News: आज के समय में सड़क हादसों के दौरान अक्सर लोग तमाशबीन बने रहते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से सामने आई एक कहानी इंसानियत पर भरोसा फिर से मजबूत कर देती है। बताया जाता है कि एक युवती सड़क पार कर रही थी, तभी वह दुर्घटना का शिकार हो गई। वह काफी देर तक सड़क पर दर्द से तड़पती रही, लेकिन वहां से गुजरने वाले लोगों ने उसकी मदद नहीं की।

टैक्सी ड्राइवर ने बिना देर किए पहुंचाया अस्पताल

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इसी दौरान टैक्सी ड्राइवर राजवीर की नजर घायल युवती पर पड़ी। उसने बिना समय गंवाए उसे अपनी टैक्सी में बैठाया और अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि युवती की जान बचाने के लिए तुरंत ऑपरेशन करना जरूरी है, जिस पर करीब दो लाख रुपये का खर्च आएगा।

इलाज के लिए बेच दी अपनी रोजी-रोटी

राजवीर के सामने सबसे बड़ी चुनौती पैसों की थी। उसकी टैक्सी ही उसके परिवार की कमाई का एकमात्र जरिया थी। लेकिन उसने इंसानियत को सबसे ऊपर रखा और अपनी नई खरीदी टैक्सी बेचकर करीब ढाई लाख रुपये का इंतजाम किया। उन्हीं पैसों से युवती का इलाज कराया गया और उसकी जान बच गई।

ठीक होने के बाद आसिमा ने लौटाया एहसान

कुछ समय बाद युवती पूरी तरह स्वस्थ हो गई। उसका नाम आसिमा बताया गया। पढ़ाई पूरी होने के बाद उसने अपने दीक्षांत समारोह (कॉन्वोकेशन) में राजवीर को विशेष रूप से बुलाया। आर्थिक तंगी के बावजूद राजवीर अपनी बुजुर्ग मां के साथ कार्यक्रम में पहुंचा और चुपचाप पीछे बैठ गया।

गोल्ड मेडल से पहले भाई का किया सम्मान

कार्यक्रम के दौरान जब आसिमा का नाम गोल्ड मेडल के लिए पुकारा गया तो उसने मंच पर जाकर सबसे पहले राजवीर को अपना मुंहबोला भाई बताया। उसने सभी के सामने पूरी घटना साझा की और कहा कि इस सम्मान का असली हकदार वही है जिसने उसकी जिंदगी बचाई।

इसके बाद आसिमा ने राजवीर को नई टैक्सी भेंट की ताकि वह फिर से अपना रोजगार शुरू कर सके। यह भावुक पल देखकर कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गईं।

इंसानियत सबसे बड़ा धर्म

राजवीर और आसिमा की यह कहानी बताती है कि निस्वार्थ भाव से की गई मदद कभी व्यर्थ नहीं जाती। जरूरतमंद की समय पर सहायता करना ही एक जिम्मेदार नागरिक होने की सबसे बड़ी पहचान है। यही छोटी-छोटी नेकियां समाज को बेहतर और मानवीय बनाती हैं।

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