Food Inflation: भारत में त्योहारों का जिक्र मिठाइयों के बिना अधूरा माना जाता है। गणेश चतुर्थी से लेकर दिवाली और छठ तक मिठाइयों की मांग काफी बढ़ जाती है। ऐसे समय में चीनी की कीमतों में तेजी आम लोगों के लिए परेशानी बढ़ा सकती है।चीनी महंगी होने का असर सिर्फ घरेलू रसोई तक सीमित नहीं रहेगा। इसका प्रभाव मिठाई कारोबार से लेकर पैकेज्ड फूड और पेय पदार्थों तक दिखाई दे सकता है।
चीनी के दाम बढ़ने की क्या है वजह?
चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे कम उत्पादन और मौसम में बदलाव को प्रमुख कारण माना जा रहा है। प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में असमान बारिश और मौसम की स्थिति ने गन्ने की फसल को प्रभावित किया है।इसके अलावा एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के लिए गन्ने और चीनी से जुड़े संसाधनों के इस्तेमाल का असर भी चीनी की उपलब्धता पर पड़ सकता है। दूसरी ओर त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से बाजार में आपूर्ति और मांग का संतुलन प्रभावित हो रहा है।
मिठाई से लेकर बिस्कुट तक महंगे हो सकते हैं
चीनी खाद्य उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है। इसका इस्तेमाल मिठाइयों के अलावा बिस्कुट, केक, चॉकलेट, आइसक्रीम और कई तरह के पेय पदार्थों में होता है।अगर चीनी की कीमतों में तेजी लंबे समय तक बनी रहती है तो कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ सकती है। इसका असर ग्राहकों पर उत्पादों की कीमत बढ़ाकर या पैकेट में सामान की मात्रा कम करके पड़ सकता है।
आम परिवार की जेब पर पड़ेगा असर
त्योहारी सीजन में परिवार पहले से ही कपड़े, उपहार, मिठाई और अन्य सामान पर अतिरिक्त खर्च करते हैं। ऐसे में खाद्य उत्पादों की कीमत बढ़ने से घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।हलवाई और छोटे कारोबारी भी बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डाल सकते हैं। इससे इस बार त्योहारों के दौरान मिठाई और अन्य खाद्य सामान खरीदना पहले की तुलना में महंगा हो सकता है।
सरकार के फैसले पर भी रहेगी नजर
चीनी की कीमतों में तेजी को रोकने के लिए बाजार में सरकारी हस्तक्षेप की संभावना पर भी नजर रहेगी। यदि जरूरत पड़ती है तो सरकार घरेलू उपलब्धता बनाए रखने के लिए स्टॉक और निर्यात से जुड़े फैसले ले सकती है।फिलहाल चीनी की कीमतों में आगे कितना बदलाव होता है, यह उत्पादन, बाजार में उपलब्ध स्टॉक और त्योहारी मांग पर निर्भर करेगा। अगर मांग के मुकाबले आपूर्ति कम रही तो आने वाले दिनों में कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
