Lieutenant Shashank Tiwari:राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक सम्मान समारोह उस समय बेहद भावुक हो गया जब शहीद लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। देश की सेवा में उनके अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान को इस प्रतिष्ठित सम्मान के जरिए नमन किया गया।
समारोह के दौरान मौजूद अधिकारी, सैन्य प्रतिनिधि और अन्य अतिथि उस समय भावुक हो उठे जब शहीद की मां मंच तक पहुंचीं। बेटे की याद में उनकी आंखों से आंसू रुक नहीं रहे थे।
मां का दर्द देख भावुक हुईं राष्ट्रपति
जब शहीद की मां मंच पर सम्मान लेने के लिए पहुंचीं, तो वह अपने बेटे को याद कर फूट-फूटकर रोने लगीं। यह दृश्य इतना मार्मिक था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
इस भावुक क्षण को देखकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रोटोकॉल तोड़ते हुए स्वयं आगे बढ़कर शहीद की मां के पास पहुंचीं। उन्होंने उन्हें सांत्वना दी और सम्मान स्वरूप कीर्ति चक्र अपने हाथों से सौंपा।
देश सेवा में सर्वोच्च बलिदान
लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी को उनके असाधारण साहस, कर्तव्यनिष्ठा और देश के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान के लिए यह सम्मान मरणोपरांत प्रदान किया गया। भारतीय सेना में उनकी भूमिका और योगदान को याद करते हुए उन्हें एक सच्चे वीर सपूत के रूप में नमन किया गया।
समारोह में छाया भावुक माहौल
राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस समारोह में मौजूद हर व्यक्ति इस घटना से गहराई से प्रभावित हुआ। शहीद की कहानी और उनकी वीरता को सुनकर कई लोग भावुक हो उठे।
यह क्षण केवल एक औपचारिक सम्मान नहीं रहा, बल्कि एक मां के दर्द, एक बेटे के बलिदान और पूरे देश की भावनाओं का प्रतीक बन गया।
देश के लिए प्रेरणा बनी कहानी
लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी की शहादत और उन्हें मिला यह सम्मान देश के युवाओं के लिए प्रेरणा है। उनका बलिदान यह संदेश देता है कि देश सेवा में दिया गया योगदान हमेशा याद रखा जाता है और वीरता कभी व्यर्थ नहीं जाती।
