EMI Rules: लोन लेकर ट्रक या कोई कमर्शियल वाहन खरीदने वाले लोगों के लिए सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला सामने आया है। अगर किसी ग्राहक से आर्थिक परेशानी के कारण EMI नहीं भरी जाती है, तो बैंक या फाइनेंस कंपनी बकाया वसूलने के लिए वाहन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। हालांकि, इसके लिए कानूनी प्रक्रिया और निर्धारित नियमों का पालन करना जरूरी है। कंपनी मनमाने तरीके से वाहन नहीं उठा सकती।
यह मामला उत्तर प्रदेश के एक ट्रक मालिक से जुड़ा है। उसने कमर्शियल ट्रक खरीदने के लिए चोलमंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी से लोन लिया था। कुछ समय बाद वह किस्तें नहीं चुका पाया। कंपनी ने नोटिस देकर ट्रक अपने कब्जे में लिया। बाद में ग्राहक ने एकमुश्त रकम जमा की, जिसके बाद ट्रक वापस कर दिया गया।
रात में ताला तोड़कर ले गए ट्रक
बाद में ग्राहक दोबारा EMI नहीं चुका सका। उसके मुताबिक, 9 अप्रैल 2023 की रात करीब एक बजे अयोध्या में सामान पहुंचाने के बाद खड़े ट्रक का स्टीयरिंग लॉक चार अज्ञात लोगों ने तोड़ा और ट्रक लेकर चले गए। ग्राहक ने आरोप लगाया कि वाहन कब्जे में लेने से पहले उसे उचित नोटिस नहीं दिया गया था। बाद में ट्रक बेच दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि लोन की शर्तों के तहत फाइनेंसर को वाहन वापस लेने का अधिकार हो सकता है, लेकिन इसके लिए जबरदस्ती या गैरकानूनी तरीका नहीं अपनाया जा सकता।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रात में ताला तोड़ना, बल प्रयोग करना या दबाव बनाकर वाहन कब्जे में लेना उचित प्रक्रिया नहीं है। फाइनेंसर को बकाया वसूली के लिए कानूनी रास्ता अपनाना होगा। मामले में ग्राहक के अधिकारों के उल्लंघन को देखते हुए कंपनी को मुआवजा देने का आदेश भी दिया गया।
EMI डिफॉल्ट पर क्या है नियम?
EMI नहीं भरने पर बैंक या NBFC अनुबंध और लागू नियमों के अनुसार वाहन वापस लेने की कार्रवाई कर सकता है। लेकिन नोटिस और निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी है। यानी लोन डिफॉल्ट होने का मतलब यह नहीं कि फाइनेंस कंपनी रात में चोरी-छिपे या बलपूर्वक गाड़ी उठा सकती है।
