Tax Free Income: जब भी टैक्स बचाने की बात होती है, तो आमतौर पर 80C के तहत निवेश और टैक्स डिडक्शन पर ध्यान दिया जाता है। लेकिन इनकम टैक्स कानून में कुछ ऐसी आय भी होती है, जिन्हें Exempt Income माना जाता है। यानी तय शर्तों को पूरा करने पर ऐसी आय आपकी टैक्सेबल इनकम में शामिल नहीं होती।
खेती से होने वाली आय
भारत में कृषि भूमि से खेती, फसल की बिक्री या कुछ परिस्थितियों में कृषि भूमि से मिलने वाली आय को टैक्स से छूट प्राप्त है। हालांकि यह छूट नियमों और आय की प्रकृति पर निर्भर करती है।
गिफ्ट, विरासत और स्कॉलरशिप
शादी में मिले कुछ उपहार और निर्धारित रिश्तेदारों से प्राप्त गिफ्ट पर सामान्यतः टैक्स नहीं लगता। इसी तरह पढ़ाई के खर्च के लिए मिली पात्र स्कॉलरशिप भी टैक्स से मुक्त हो सकती है। विरासत में मिली संपत्ति या रकम पर भी प्राप्तकर्ता के स्तर पर सामान्यतः आयकर नहीं लगाया जाता।
ग्रैच्युटी और लीव एनकैशमेंट
रिटायरमेंट या नौकरी समाप्त होने पर मिलने वाली ग्रैच्युटी और बची छुट्टियों के बदले मिलने वाली रकम पर नियमों के तहत टैक्स छूट मिल सकती है। सरकारी और निजी कर्मचारियों के लिए इसकी शर्तें अलग-अलग हैं।
HUF और पार्टनरशिप फर्म से हिस्सा
HUF से मिलने वाला निर्धारित हिस्सा और पार्टनरशिप फर्म या LLP के मुनाफे में पार्टनर का हिस्सा सामान्यतः दोबारा टैक्स के दायरे में नहीं आता। हालांकि फर्म से मिलने वाली सैलरी या ब्याज की टैक्स देनदारी अलग हो सकती है।
PPF, SSY और PF से जुड़े लाभ
PPF और सुकन्या समृद्धि योजना जैसे कुछ निवेशों पर मिलने वाला ब्याज टैक्स छूट के दायरे में आता है। मान्य EPF में निर्धारित अवधि पूरी करने के बाद निकाली गई रकम भी नियमों के तहत टैक्स-फ्री हो सकती है।
लाइफ इंश्योरेंस की मैच्योरिटी
लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी की मैच्योरिटी राशि भी Section 10(10D) के तहत निर्धारित शर्तों को पूरा करने पर टैक्स से मुक्त हो सकती है। प्रीमियम और पॉलिसी से जुड़े नियमों को ध्यान में रखना जरूरी है।
Exempt Income और Deduction में अंतर
Exempt Income ऐसी आय है जो निर्धारित शर्तों के तहत टैक्सेबल इनकम में शामिल नहीं होती, जबकि Tax Deduction में कुल आय की गणना के बाद पात्र निवेश या खर्च के आधार पर आय घटाई जाती है। इसलिए टैक्स प्लानिंग करते समय दोनों के अंतर को समझना जरूरी है।
