RBI Bank Account Rules: अगर बैंक के ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग सिस्टम में किसी लेन-देन के साइबर फ्रॉड या मनी-म्यूल गतिविधि से जुड़े होने का संकेत मिलता है, तो उस रकम को अस्थायी रूप से रोकने का प्रस्ताव है। प्रस्तावित प्रक्रिया का उद्देश्य फ्रॉड की रकम को दूसरे खातों में ट्रांसफर होने से रोकना है।
प्रस्ताव के मुताबिक, 1,000 रुपये या उससे अधिक के किसी लेन-देन पर तब कार्रवाई की जा सकती है, जब बैंक के सिस्टम में उसे फ्रॉड से जुड़ा फ्लैग मिला हो।
पूरे बैंक खाते पर भी हो सकती है रोक
अगर बैंक को संदेह है कि पूरा खाता मनी-म्यूल गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, तो उस खाते से पैसे निकालने या ट्रांसफर करने यानी डेबिट पर भी अस्थायी रोक लगाई जा सकती है।
मनी-म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते को कहा जाता है, जिसका इस्तेमाल साइबर फ्रॉड या अवैध तरीके से हासिल रकम को प्राप्त करने और आगे दूसरे खातों में भेजने के लिए किया जाता है। कई बार लोग जानबूझकर ऐसा करते हैं, जबकि कुछ लोग बिना पूरी जानकारी के अपना खाता किसी दूसरे को इस्तेमाल करने दे देते हैं।
ग्राहक को मिलेगी नोटिस और जवाब का मौका
प्रस्तावित नियमों के तहत बैंक को अस्थायी डेबिट रोक लगाने से पहले ग्राहक को नोटिस देना होगा। इसमें रोक की वजह, उसे हटाने की प्रक्रिया और संबंधित लेन-देन की जानकारी शामिल होगी।
ग्राहक को अपना जवाब देने के लिए 20 दिन तक का समय मिल सकता है। वहीं, अस्थायी डेबिट रोक सामान्य तौर पर अधिकतम 60 दिन तक रह सकती है।
अप्रैल 2027 से लागू होने का प्रस्ताव
अभी ये RBI के प्रस्तावित निर्देश हैं और अंतिम नियम नहीं हैं। RBI ने इस ड्राफ्ट पर लोगों और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं। सुझाव देने की अंतिम तारीख 2 अक्टूबर 2026 तय की गई है। प्रस्तावित निर्देश 1 अप्रैल 2027 से लागू किए जाने हैं।
