आज के समय में डायबिटीज दुनिया भर में तेजी से बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में से एक बन चुकी है। भारत में भी करोड़ों लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं और हर साल इसके मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि डायबिटीज को नियंत्रित रखने में दवाइयों के साथ-साथ सही लाइफस्टाइल और संतुलित खान-पान की बेहद अहम भूमिका होती है। यदि व्यक्ति अपनी दिनचर्या को संतुलित रखे, तो ब्लड शुगर स्तर को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
सही खान-पान है सबसे जरूरी
डॉक्टरों के अनुसार डायबिटीज के मरीजों को अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। शरीर को स्वस्थ और सक्रिय बनाए रखने के लिए पौष्टिक भोजन जरूरी है। हरी पत्तेदार सब्जियां, साबुत अनाज, प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ और विटामिन युक्त फल ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। वहीं अधिक मीठी और ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाली चीजों से दूरी बनाए रखना फायदेमंद माना जाता है।
पूरे शरीर को प्रभावित कर सकती है डायबिटीज
डायबिटीज केवल ब्लड शुगर बढ़ने की समस्या नहीं है, बल्कि इसका असर शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ सकता है। लंबे समय तक अनियंत्रित रहने पर यह किडनी, आंखों, लिवर और प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित कर सकती है। इसलिए समय रहते इसे नियंत्रित करना बेहद जरूरी माना जाता है।
कब पड़ती है इंसुलिन की जरूरत
डॉक्टरों के अनुसार जब शरीर में इंसुलिन हार्मोन का उत्पादन प्रभावित हो जाता है, तब ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है। इंसुलिन शरीर की कोशिकाओं तक ग्लूकोज पहुंचाने में मदद करता है, जिससे शरीर को ऊर्जा मिलती है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती चरण में सही लाइफस्टाइल अपनाकर कई मामलों में इंसुलिन की जरूरत को कम किया जा सकता है।
नियमित व्यायाम से मिलता है बड़ा फायदा
डायबिटीज रोगियों के लिए रोजाना कम से कम 30 से 40 मिनट तक व्यायाम करना बेहद जरूरी माना जाता है। वॉक करना, साइकिल चलाना और तैराकी जैसे सामान्य व्यायाम भी ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। नियमित व्यायाम से वजन नियंत्रित रहता है और शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता भी बेहतर होती है।
वजन नियंत्रण भी है जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार मोटापा डायबिटीज के प्रमुख जोखिम कारकों में से एक है। इसलिए वजन को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है। संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधियों के जरिए वजन को नियंत्रित करके डायबिटीज से होने वाली जटिलताओं के खतरे को कम किया जा सकता है।
