Awareness: आज के समय में फेफड़ों का कैंसर केवल धूम्रपान करने वालों की बीमारी नहीं रह गया है। हाल के वर्षों में यह देखा गया है कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी इस गंभीर बीमारी का शिकार हो रहे हैं, जिन्होंने कभी सिगरेट या बीड़ी का सेवन नहीं किया।
चौंकाने वाले आंकड़े
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल लगभग एक लाख नए फेफड़ों के कैंसर के मामले सामने आते हैं। इनमें से करीब 40% मरीज ऐसे होते हैं जिनका धूम्रपान से कोई संबंध नहीं होता। यह तथ्य इस धारणा को गलत साबित करता है कि फेफड़ों का कैंसर केवल धूम्रपान करने वालों को ही होता है।
वायु प्रदूषण
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते वायु प्रदूषण ने इस समस्या को गंभीर बना दिया है। हवा में मौजूद सूक्ष्म कण, खासकर PM2.5, सीधे फेफड़ों में जाकर नुकसान पहुंचाते हैं।
मुख्य कारणों में शामिल हैं:
•शहरीकरण: निर्माण कार्य और धूल का बढ़ता स्तर
औद्योगिक प्रदूषण: फैक्ट्रियों से निकलने वाली जहरीली गैसें
वाहनों की संख्या में वृद्धि: खराब होती हवा की गुणवत्ता (AQI)
ये सभी कारक मिलकर फेफड़ों को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
क्या रखें ध्यान?
प्रदूषण वाले क्षेत्रों में मास्क का उपयोग करें
घर के अंदर एयर क्वालिटी का ध्यान रखें
नियमित स्वास्थ्य जांच करवाएं
लंबे समय तक खांसी या सांस की समस्या को नजरअंदाज न करें
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