Health Update:शुगर या मधुमेह एक ऐसी बीमारी है जो केवल शरीर को ही नहीं, बल्कि व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है। एक स्वस्थ जीवन जीने के लिए सबसे अनिवार्य शर्त यह है कि व्यक्ति का ब्लड शुगर लेवल हमेशा नियंत्रण में रहे। मधुमेह के मरीजों को हर निवाले का हिसाब रखना पड़ता है, क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही भी शरीर में शर्करा के स्तर को अनियंत्रित कर सकती है। आमतौर पर दालों को प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक विशेष दाल शुगर के मरीजों के लिए ‘धीमे जहर’ का काम कर सकती है?
मसूर की दाल और शुगर का बढ़ता खतरा
हालिया शोध और स्वास्थ्य विमर्श में ‘मसूर की दाल’ को लेकर चिंताएं जताई गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मसूर की दाल का सेवन सही विधि से न किया जाए, तो यह मधुमेह के रोगियों के लिए बेहद जोखिम भरी साबित हो सकती है। इस दाल के सेवन के तुरंत बाद शरीर में ग्लूकोज की मात्रा में अचानक उछाल देखा जा सकता है, जो सीधे तौर पर हृदय और गुर्दों पर दबाव डालता है।
क्यों है मसूर की दाल खतरनाक?
इसका सबसे मुख्य कारण है इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI)। किसी भी खाद्य पदार्थ का ग्लाइसेमिक इंडेक्स यह बताता है कि वह वस्तु शरीर में जाकर कितनी तेजी से शुगर बढ़ाती है। मसूर की दाल, विशेषकर धुली हुई लाल मसूर, जल्दी पच जाती है। तेजी से पचने के कारण यह रक्त प्रवाह में ग्लूकोज को बहुत कम समय में रिलीज कर देती है। जब शुगर का स्तर अचानक (Spike) बढ़ता है, तो इंसुलिन रेजिस्टेंस वाले मरीजों के लिए इसे संभालना नामुमकिन हो जाता है।
पाचन तंत्र और इंसुलिन पर प्रभाव
मधुमेह के मरीजों का पाचन तंत्र सामान्य व्यक्ति की तुलना में अलग तरह से व्यवहार करता है। मसूर की दाल में मौजूद कार्बोहाइड्रेट जब शरीर में टूटते हैं, तो वे तेजी से शर्करा में बदल जाते हैं। यदि मरीज पहले से ही उच्च शुगर स्तर से जूझ रहा है, तो मसूर की दाल का सेवन उसकी स्थिति को और अधिक गंभीर बना सकता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि बिना डॉक्टर के परामर्श के या अत्यधिक मात्रा में इस दाल का सेवन करने से बचें।









