Health Benefits: भारतीय रसोई में हल्दी और अदरक का इस्तेमाल लंबे समय से स्वाद और पारंपरिक स्वास्थ्य उपयोगों के लिए किया जाता रहा है। हल्दी में करक्यूमिन और अदरक में जिंजरोल जैसे बायोएक्टिव कंपाउंड पाए जाते हैं। इन यौगिकों के एंटीऑक्सीडेंट और सूजन से जुड़ी प्रक्रियाओं पर प्रभाव को लेकर शोध भी हुआ है।
हालांकि, इन मसालों को किसी बीमारी का इलाज या दवा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। इन्हें संतुलित डाइट का हिस्सा बनाकर सीमित मात्रा में लेना अधिक उचित है।
सूजन संबंधी प्रक्रियाओं में मदद
करक्यूमिन और जिंजरोल जैसे यौगिकों में एंटी-इंफ्लेमेटरी गतिविधि का अध्ययन किया गया है। भोजन में हल्दी और अदरक का सामान्य मात्रा में इस्तेमाल शरीर की सूजन संबंधी प्रक्रियाओं को सपोर्ट कर सकता है।
एंटीऑक्सीडेंट सपोर्ट
हल्दी और अदरक दोनों में ऐसे प्राकृतिक यौगिक मौजूद होते हैं जो एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि से जुड़े हैं। इन्हें डाइट में शामिल करने से शरीर को इन यौगिकों का स्रोत मिल सकता है। हालांकि, फल, सब्जियां और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ भी जरूरी हैं।
पाचन के लिए उपयोगी
अदरक का पारंपरिक इस्तेमाल पाचन संबंधी परेशानी और पेट की असहजता में किया जाता रहा है। कुछ शोध इसके संभावित डायजेस्टिव लाभों की ओर भी संकेत करते हैं। लगातार पेट दर्द या दूसरी गंभीर समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह जरूरी है।अदरक पर मतली को लेकर काफी शोध हुआ है। कुछ परिस्थितियों में इसका सेवन मतली की तीव्रता कम करने में मदद कर सकता है। लगातार या किसी बीमारी से जुड़ी मतली में चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।
ज्वाइंट हेल्थ को सपोर्ट
हल्दी और अदरक के सक्रिय यौगिकों पर जोड़ों की असहजता और सूजन के संदर्भ में भी अध्ययन हुए हैं। कुछ लोगों को हल्का लाभ मिल सकता है, लेकिन लंबे समय के दर्द में इन्हें इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
इम्यून सिस्टम को सपोर्ट
दोनों मसालों में मौजूद पौध-आधारित यौगिक सामान्य स्वास्थ्य को सपोर्ट कर सकते हैं। हालांकि, केवल हल्दी-अदरक का सेवन बीमारियों से बचाव की गारंटी नहीं देता।
कैसे करें सेवन?
हल्दी और अदरक को दाल, सब्जी, सूप या गर्म पेय में सीमित मात्रा में शामिल किया जा सकता है। दूध या पानी में थोड़ी हल्दी और ताजा अदरक डालकर गर्म पेय भी बनाया जा सकता है। अधिक मात्रा में सेवन करने से फायदा बढ़ेगा, यह जरूरी नहीं है।
