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स्कूली बच्चों की जान पर आया खतरा, डंपर की टक्कर से भाईंदर में मचा हड़कंप,भारी वाहनों की लापरवाही पर फिर उठे सवाल

Mumbai News: मुंबई से सटे मीरा-भाईंदर इलाके में मंगलवार शाम एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया। भाईंदर पूर्व के पी.के. रोड पर एक तेज रफ्तार और बेकाबू डंपर ने स्कूली बच्चों से भरी बस को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि स्कूल बस का पिछला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि बस में सवार सभी बच्चे पूरी तरह सुरक्षित रहे और किसी के घायल होने की खबर नहीं है।

शाम करीब साढ़े पांच बजे हुआ हादसा

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मिली जानकारी के मुताबिक यह घटना मंगलवार शाम करीब 5:30 बजे हुई। स्कूल बस अपने तय रास्ते पर बच्चों को उनके घर छोड़ने जा रही थी। इसी दौरान पीछे से तेज गति में आ रहे एक डंपर ने नियंत्रण खो दिया और बस को पीछे से टक्कर मार दी।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार डंपर की रफ्तार काफी ज्यादा थी, जिसकी वजह से टक्कर का असर गंभीर दिखाई दिया। हादसे के बाद कुछ देर के लिए इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

बच्चों के आगे बैठे होने से टला बड़ा खतरा

हादसे के समय बस में बच्चों की संख्या कम थी और सभी बच्चे बस के अगले हिस्से में बैठे हुए थे। यही वजह रही कि टक्कर का असर बच्चों तक नहीं पहुंचा और कोई बड़ी अनहोनी नहीं हुई।घटना की जानकारी मिलने के बाद बच्चों के परिजन भी मौके पर पहुंचे। बच्चों को सुरक्षित देखकर अभिभावकों ने राहत की सांस ली, लेकिन इस घटना ने उनकी चिंता जरूर बढ़ा दी है।

भारी वाहनों की लापरवाही पर उठे सवाल

इस हादसे के बाद एक बार फिर मीरा-भाईंदर में भारी वाहनों की तेज रफ्तार और लापरवाह ड्राइविंग को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में डंपर और सीमेंट मिक्सर जैसे भारी वाहन अक्सर तेज गति से चलते हैं, जिससे आए दिन दुर्घटना का खतरा बना रहता है।नागरिकों ने पुलिस और आरटीओ से मांग की है कि भारी वाहनों पर सख्त निगरानी रखी जाए और भीड़भाड़ वाले समय में उनके आवागमन पर नियंत्रण लगाया जाए।

सड़क सुरक्षा के लिए जरूरी हैं कड़े कदम

भाईंदर की यह घटना साफ तौर पर बताती है कि सड़क सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन कितना जरूरी है। इस बार तो बच्चों की जान बच गई, लेकिन अगर समय रहते तेज रफ्तार और लापरवाही करने वाले वाहन चालकों पर कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है।प्रशासन के लिए यह घटना एक चेतावनी है कि स्कूली बच्चों और आम नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यातायात व्यवस्था को और मजबूत किया जाए।

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