Maharashtra news:दिशा सालियान की मौत का मामला एक बार फिर चर्चा में है। बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब CBI इस मामले की जांच कर रही है। 13 सितंबर 2026 को CBI ने FIR दर्ज की थी। हालांकि FIR में किसी व्यक्ति को आरोपी घोषित नहीं किया गया है। शिकायत में जिन लोगों के नाम या भूमिकाओं का जिक्र है, उनकी जांच की जानी है।
इसी बीच दिशा के पिता सतीश सालियान के वकील नीलेश ओझा ने CCTV फुटेज और पुराने पुलिस रिकॉर्ड को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उनके कुछ दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच का विषय है।
CCTV फुटेज को लेकर क्या है दावा?
वकील नीलेश ओझा का दावा है कि घटना से जुड़े CCTV का DVR पुलिस ने अपने कब्जे में लेकर सील किया था। उनका सवाल है कि जब रिकॉर्डिंग सुरक्षित की गई थी, तो बाद में फुटेज के कुछ हिस्सों को लेकर सवाल कैसे उठे।
ओझा के मुताबिक, 2025 में हाईकोर्ट की सुनवाई के दौरान CCTV फुटेज की फॉरेंसिक जांच को लेकर भी सवाल उठे थे। उनका दावा है कि बाद में फुटेज को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया।
वकील ने यह भी आरोप लगाया है कि 4 जून से 9 जून के बीच की कुछ रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं थी और CCTV बैकअप वाली हार्ड डिस्क को लेकर भी सवाल सामने आए। इन दावों की पुष्टि CBI की जांच और आगे आने वाले आधिकारिक निष्कर्षों से ही हो सकेगी।
सचिन वाझे की बहाली का भी जिक्र
नीलेश ओझा ने पुलिस अधिकारी सचिन वाझे की दोबारा सेवा में बहाली का मुद्दा भी उठाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उनके बेटे आदित्य ठाकरे की ओर से वाझे की बहाली को लेकर दबाव बनाया गया था।
ओझा ने इस दावे के समर्थन में पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के कथित बयान का हवाला दिया है। हालांकि इन आरोपों की कानूनी स्थिति और जांच में इनकी प्रासंगिकता CBI को तय करनी होगी।
देवेंद्र फडणवीस का नाम क्यों आया?
वकील ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का भी जिक्र किया और उन्हें वाझे की बहाली से जुड़े घटनाक्रम की जानकारी रखने वाला संभावित गवाह बताया। इस संबंध में भी सामने आए दावों और पुराने बयानों की जांच जरूरी होगी।
CBI जांच में अब किन बातों पर नजर?
बॉम्बे हाईकोर्ट ने CBI को दिशा सालियान की मौत से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करने का निर्देश दिया था। अदालत ने यह भी कहा था कि पर्याप्त सामग्री मिलने तक किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जाना चाहिए।
अब CCTV रिकॉर्ड, डिजिटल सबूत, पुराने पुलिस दस्तावेज, फॉरेंसिक सामग्री और गवाहों के बयान जांच के महत्वपूर्ण हिस्से हो सकते हैं। CBI की जांच आगे बढ़ने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों और उठाए गए सवालों को कितना सबूत मिलता है। इससे पहले मुंबई पुलिस और SIT की जांच में किसी आपराधिक साजिश के पर्याप्त सबूत नहीं मिलने की बात सामने आई थी।
