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लखनऊ अग्निकांड में सामने आई एक और दर्दनाक तस्वीर, आग में फंसे मासूम कुत्ते-बिल्लियां,रेस्क्यू के भावुक कर देने वाले दृश्य आए सामने

Lucknow Fire Incident: लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे में कई लोगों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए। लेकिन इस त्रासदी का एक ऐसा पहलू भी सामने आया जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। आग की लपटों के बीच कई बेजुबान जानवर भी फंस गए थे, जो खुद को बचाने में असहाय थे।जिस इमारत में आग लगी थी, उसके निचले हिस्से में पालतू जानवरों की देखभाल और ग्रूमिंग से जुड़ा एक सेंटर संचालित हो रहा था। आग लगने के समय वहां कई कुत्ते, पिल्ले और बिल्लियां मौजूद थीं। अचानक आग फैलने से जानवरों को बाहर निकालना मुश्किल हो गया।

आग बढ़ने के साथ बढ़ी जानवरों की परेशानी

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शुरुआत में आग इतनी भयावह नहीं थी और कुछ लोगों के साथ कुछ जानवरों को भी सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था। हालांकि कुछ ही समय में आग ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे बचाव कार्य काफी कठिन हो गया।एक युवक, जो अपने पालतू कुत्ते को ग्रूमिंग के लिए लेकर आया था, ने बताया कि शुरुआती समय में हालात सामान्य थे, लेकिन आग तेजी से फैलने के कारण कई जानवर अंदर ही फंस गए।

पुलिस और फायर टीम ने दिखाई मानवता

हादसे की जानकारी मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। जवानों ने अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों के साथ-साथ जानवरों को भी बचाने की कोशिश की। कई पुलिसकर्मी अपनी गोद में डरे-सहमे कुत्तों और बिल्लियों को लेकर बाहर निकलते दिखाई दिए।स्थानीय लोग और पशु प्रेमी भी बचाव अभियान में शामिल हुए। उन्होंने जोखिम उठाकर अंदर फंसे जानवरों को सुरक्षित निकालने का प्रयास किया।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

एनिमल एक्टिविस्ट के अनुसार, दुकान और उससे जुड़े क्लिनिक में करीब 20 से 22 कुत्ते और पिल्ले तथा लगभग एक दर्जन बिल्लियां मौजूद थीं। कई जानवरों को बचा लिया गया, लेकिन कुछ के फंसे होने की आशंका भी जताई जा रही है।घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मौके का निरीक्षण कर अधिकारियों से पूरी जानकारी ली। शुरुआती जांच में इमारत की सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक अनुमतियों को लेकर सवाल सामने आए हैं। लोगों का कहना है कि अगर सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन किया गया होता, तो शायद इंसानों के साथ-साथ इन मासूम बेजुबानों की जान भी खतरे में नहीं पड़ती।

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