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BRICS पर चिदंबरम के बयान के बचाव में उतरे पवन खेड़ा,IMF को लेकर सरकार पर साधा निशाना

Pawan Khera BRICS statement: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने BRICS को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद पी. चिदंबरम की टिप्पणी का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी के नेताओं को अंतरराष्ट्रीय और कूटनीतिक मुद्दों पर अपनी राय रखने और उसे सार्वजनिक रूप से व्यक्त करने की पूरी आजादी है। खेड़ा ने यह बात शुक्रवार को नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान कही।

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दरअसल, पी. चिदंबरम ने हाल में BRICS की पिछली बैठकों से भारत को मिले ठोस फायदों पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि पिछले दो-तीन BRICS सम्मेलनों से उन्हें कोई खास ठोस परिणाम नजर नहीं आया।

BRICS, SCO, G20 और QUAD पर उठाया सवाल

चिदंबरम ने भारत की विभिन्न बहुपक्षीय समूहों में भागीदारी का जिक्र करते हुए पूछा था कि BRICS के अलावा भारत SCO, G20 और QUAD का भी हिस्सा है, लेकिन इन संगठनों से देश को वास्तविक और ठोस फायदा कितना मिल रहा है, यह देखने की जरूरत है।

उनके इस बयान के बाद बीजेपी नेताओं की ओर से कांग्रेस पर सवाल उठाए गए। इसके जवाब में पवन खेड़ा ने चिदंबरम के विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि किसी नेता को अपनी राय रखने का अधिकार है। उनके मुताबिक, अलग-अलग मुद्दों पर पार्टी के भीतर अलग विचार होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।

IMF रिपोर्ट को लेकर BJP पर निशाना

पवन खेड़ा ने इस दौरान बीजेपी नेता रवि शंकर प्रसाद पर भी निशाना साधा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF की रिपोर्ट और उसके आंकड़ों को लेकर सरकार के रुख पर सवाल खड़े किए।

खेड़ा का आरोप था कि जब IMF के आंकड़े सरकार के दावों के अनुरूप नहीं होते हैं, तो उस संस्था पर सवाल उठाए जाते हैं। वहीं, जब IMF की रिपोर्ट सरकार के पक्ष में जाती है तो उसी रिपोर्ट को उपलब्धि के तौर पर पेश किया जाता है।

उन्होंने इसे राजनीतिक पाखंड बताते हुए बीजेपी से अपने रुख में स्पष्टता रखने को कहा। खेड़ा ने तंज कसते हुए कहा कि IMF को लेकर रवि शंकर प्रसाद को अपना मन पक्का करना चाहिए।

BRICS को लेकर फिर तेज हुई सियासी बहस

पी. चिदंबरम की टिप्पणी और पवन खेड़ा के बचाव के बाद BRICS को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। एक तरफ कांग्रेस भारत की बहुपक्षीय कूटनीति से मिलने वाले वास्तविक लाभों पर सवाल उठा रही है, वहीं बीजेपी की ओर से कांग्रेस के रुख पर निशाना साधा जा रहा है।

ऐसे में BRICS 2026 को लेकर होने वाली चर्चाओं पर भी राजनीतिक नजरें बनी हुई हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

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