Firecracker Factory Blast: लखनऊ के नगराम क्षेत्र के देवती गांव में संचालित एक लाइसेंसी पटाखा फैक्ट्री में सोमवार सुबह करीब 11:30 बजे जोरदार विस्फोट हो गया। धमाका इतना शक्तिशाली था कि फैक्ट्री की इमारत का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया और आसपास के इलाके में दहशत फैल गई। घटना के समय फैक्ट्री में काम कर रहे कई लोग इसकी चपेट में आ गए।
हादसे में खुजौली गांव निवासी मारिया गंभीर रूप से झुलस गई थीं, जबकि देवती गांव का 16 वर्षीय मोहित घायल हो गया। दोनों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उपचार के दौरान मारिया की मौत हो गई। मोहित का इलाज जारी है और उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
मौके पर पहुंची पुलिस और राहत टीमें
घटना की सूचना मिलते ही नगराम पुलिस, दमकल विभाग और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंच गई। राहत एवं बचाव अभियान चलाकर मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकाला गया। पुलिस ने पूरे क्षेत्र को घेरकर जांच शुरू कर दी।
जांच में उजागर हुईं गंभीर खामियां
प्रारंभिक जांच में पता चला कि फैक्ट्री संचालक मोहम्मद शफीक के पास विस्फोटक पदार्थों के निर्माण और बिक्री का वैध लाइसेंस मौजूद था, जिसकी वैधता मार्च 2027 तक है। हालांकि, लाइसेंस होने के बावजूद सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था।
जांच अधिकारियों के अनुसार फैक्ट्री में लगाया गया फायर एक्सटिंग्विशर काम नहीं कर रहा था। इसके अलावा आग बुझाने के लिए पर्याप्त मात्रा में बालू और पानी की भी व्यवस्था नहीं थी। विस्फोटक सामग्री के साथ काम करने वाली इकाइयों में यह गंभीर लापरवाही मानी जाती है।
महिलाओं और नाबालिगों से कराया जा रहा था काम
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि फैक्ट्री में महिलाओं और नाबालिग बच्चों से भी पटाखा निर्माण का कार्य कराया जा रहा था। विशेषज्ञों के अनुसार विस्फोटक सामग्री के बीच नाबालिगों को काम पर लगाना सुरक्षा मानकों का उल्लंघन है।
अधिकारियों का कहना है कि इसी लापरवाही ने हादसे को और गंभीर बना दिया, जिसके कारण एक युवती की जान चली गई।
फैक्ट्री संचालक पर दर्ज हुआ मुकदमा
उपनिरीक्षक चंद्रशेखर की तहरीर पर नगराम थाने में फैक्ट्री संचालक मोहम्मद शफीक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस विभिन्न धाराओं में कार्रवाई करते हुए मामले की विस्तृत जांच कर रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों ने उठाए सवाल
हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्ट्री लंबे समय से संचालित हो रही थी, लेकिन सुरक्षा मानकों की जांच समय पर नहीं की गई।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि नियमित निरीक्षण होता और कमियों को पहले ही दूर कराया जाता, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। उन्होंने फैक्ट्री संचालन की निगरानी करने वाले विभागों की भूमिका की भी जांच की मांग की है।
