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बेटी खोई, जमीन बिकी और 20 साल बीते… निठारी कांड के पीड़ित परिवार आज भी न्याय के इंतजार में

Noida news:करीब दो दशक पहले नोएडा के निठारी की कोठी नंबर D-5 से सामने आए बच्चों के लापता होने और मानव अवशेष मिलने के मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। अब आरोपी रहे सुरिंदर कोली की हरिद्वार में मौत के बाद इस मामले से जुड़े पीड़ित परिवारों का दर्द एक बार फिर सामने आया है।

कोठी D-5 से शुरू हुई थी भयावह कहानी

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29 दिसंबर 2006 को निठारी की कोठी नंबर D-5 के आसपास अचानक पुलिस और मीडिया की भीड़ जुटने लगी थी। जांच के दौरान नाले से मानव अवशेष और कंकाल मिलने के बाद लापता बच्चों के परिवारों में हड़कंप मच गया। इस मामले में कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके यहां काम करने वाले सुरिंदर कोली पर गंभीर आरोप लगे थे।

मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ कई बच्चों और लड़कियों के लापता होने की कड़ियां इस केस से जोड़ी गईं। दोनों आरोपियों को अलग-अलग मामलों में अदालतों से सजा भी मिली थी।

सुप्रीम कोर्ट से बरी होने के बाद कोली की मौत

निठारी मामले में सुरिंदर कोली को नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट से जुड़े आखिरी मामले में भी बरी कर दिया गया था। अब करीब 11 महीने बाद हरिद्वार में उसकी मौत की खबर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, वह वहां चाय की दुकान चला रहा था और उसी जगह उसका शव मिला। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

कोली की मौत की खबर ने उन परिवारों के पुराने जख्म फिर खोल दिए, जिन्होंने इस मामले में अपने बच्चों को खोया था।

बेटी को खोने वाले परिवार को अब भी न्याय का इंतजार

निठारी कांड में अपनी 10 साल की बेटी ज्योति को खोने वाले झब्बू लाल का कहना है कि करीब 20 साल बीतने के बाद भी उनका दर्द कम नहीं हुआ। वह अपनी पत्नी के साथ आज भी D-5 के पास कपड़ों पर इस्त्री करके गुजारा करते हैं।

उनका दावा है कि केस की कानूनी लड़ाई में उन्होंने काफी पैसा खर्च किया और अपनी जमीन तक बेचनी पड़ी, लेकिन उन्हें अब भी न्याय का इंतजार है।

‘कोली के पास कई राज थे’

झब्बू लाल की पत्नी सुनीता देवी ने दावा किया कि मामले के शुरुआती दौर में सुरिंदर कोली ने उनसे कहा था कि उनकी बेटी की मौत गलती से हुई थी। सुनीता का यह भी दावा है कि इस बातचीत की रिकॉर्डिंग हुई थी, लेकिन उसे अदालत में पेश नहीं किया गया।

परिवार के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है। वहीं, कोली की मौत के बाद पीड़ित परिवारों के बीच यह सवाल फिर उठ रहा है कि निठारी कांड में हुई मौतों की पूरी सच्चाई आखिर सामने आएगी या नहीं।

दो दशक बाद भी कई सवाल कायम

निठारी कांड को लगभग 20 साल हो चुके हैं, लेकिन पीड़ित परिवारों के लिए यह मामला आज भी खत्म नहीं हुआ है। अदालतों के फैसलों के बाद भी वे अपने बच्चों की मौत और मामले की जांच से जुड़े कई सवालों के जवाब चाहते हैं। कोली की मौत ने इन सवालों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

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