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चंद मिनटों का झगड़ा और बुझ गया घर का चिराग, मोबाइल विवाद में 7 साल के बच्चे की मौत

Uttar Pradesh News: उरई में एक बेहद दुखद घटना सामने आई है, जहां मोबाइल फोन को लेकर भाई-बहन के बीच हुई कहासुनी के बाद सात साल के बच्चे की जान चली गई। घटना के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है और पूरे गांव में शोक का माहौल है। यह मामला एक बार फिर बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल और उनकी भावनात्मक समझ को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

मोबाइल छीनने पर नाराज हुआ मासूम

मिली जानकारी के मुताबिक, घटना कुठौंद क्षेत्र के डगरू का पुरवा गांव की है। यहां रहने वाले सोनू सिंह खेती के साथ मजदूरी करते हैं। परिवार में उनकी पत्नी संगीता, नौ साल की बेटी जानवी और सात साल का बेटा रितिक था।

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बताया गया कि बुधवार सुबह दोनों भाई-बहन घर के कमरे में खेल रहे थे। इसी दौरान रितिक ने अपने पिता का मोबाइल फोन लिया और उस पर वीडियो देखने लगा। तभी उसकी बड़ी बहन जानवी वहां पहुंची और उससे मोबाइल छीनकर भाग गई।मोबाइल छिनने से रितिक नाराज हो गया। रिपोर्ट के अनुसार, गुस्से में उसने कमरे में रखा गमछा लिया और तख्त के ऊपर लगी खूंटी से फंदा बना लिया। इसके बाद उसने आत्मघाती कदम उठा लिया।

बहन ने देखा तो मच गई चीख-पुकार

कुछ देर बाद जब जानवी कमरे में पहुंची तो उसने अपने छोटे भाई को फंदे पर लटका देखा। यह देखकर वह घबरा गई और जोर-जोर से चिल्लाने लगी। उसकी आवाज सुनकर माता-पिता मौके पर पहुंचे।

परिजन आनन-फानन में रितिक को अस्पताल लेकर गए, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मासूम की मौत की खबर सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटना के बाद गांव में भी शोक का माहौल है।

बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल पर फिर उठे सवाल

यह घटना बताती है कि छोटी उम्र में बच्चों को गुस्से और निराशा जैसी भावनाओं से निपटना सिखाना कितना जरूरी है। हालांकि, इस घटना को केवल मोबाइल की लत से जोड़कर देखना सही नहीं होगा। बच्चों की भावनात्मक स्थिति, व्यवहार और सुरक्षा पर परिवार को लगातार ध्यान देने की जरूरत है।

माता-पिता बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल के लिए समय और नियम तय कर सकते हैं। साथ ही, बच्चों से बातचीत करना और उन्हें अपनी परेशानी खुलकर बताने के लिए प्रोत्साहित करना भी जरूरी है। अगर बच्चा असामान्य रूप से परेशान, गुस्से में या निराश दिखाई दे, तो उसकी बात को गंभीरता से सुनना चाहिए।रितिक की मौत एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है। यह घटना बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर संवेदनशीलता बढ़ाने की जरूरत याद दिलाती है।

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