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एक कुर्सी के लिए रुक गई वैशाली एक्सप्रेस, 59 साल के गार्ड ने रेलवे को दिखाया आईना,घंटों लेट हुई वैशाली एक्सप्रेस

Railway News: भारतीय रेलवे में ट्रेन के लेट होने की वजह अक्सर सिग्नल, तकनीकी खराबी या मौसम होती है, लेकिन वैशाली एक्सप्रेस के साथ मामला थोड़ा अलग रहा। नई दिल्ली से ललितग्राम जा रही वैशाली एक्सप्रेस सोमवार सुबह गोरखपुर जंक्शन पहुंची तो ट्रेन मैनेजर को गार्ड कोच में बैठने के लिए फिक्स्ड सीट ही नहीं मिली। इसके बाद ट्रेन को प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर रोक दिया गया।

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ट्रेन पहले ही करीब 31 मिनट की देरी से सुबह 9:48 बजे गोरखपुर पहुंची थी। लेकिन सीट की समस्या के कारण यहां से ट्रेन करीब 1 घंटे 9 मिनट की देरी से रवाना हो सकी। यात्रियों को काफी देर तक ट्रेन के चलने का इंतजार करना पड़ा।

59 साल के ट्रेन मैनेजर ने नहीं किया समझौता

ट्रेन मैनेजर रामाशिश दास की उम्र 59 साल है और वह रिटायरमेंट के करीब हैं। उनका कहना था कि तेज रफ्तार ट्रेन में घंटों ड्यूटी करने वाले गार्ड के लिए बैठने की उचित व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को इसकी जानकारी दी और कोच की तस्वीरें भी भेजीं।

दास ने साफ कर दिया कि बिना उचित सीट के वह ड्यूटी करने का जोखिम नहीं लेंगे। उनका तर्क था कि अगर सफर के दौरान कोई समस्या आती है तो इसकी जिम्मेदारी आखिरकार ट्रेन मैनेजर पर ही आएगी। इसलिए सुरक्षा और काम की सही व्यवस्था से समझौता नहीं किया जा सकता।

देवरिया में मिली प्लास्टिक की कुर्सी

गोरखपुर में सीट की समस्या तुरंत दूर नहीं हो सकी। रेलवे की ओर से बताया गया कि आगे देवरिया में व्यवस्था कर दी जाएगी। देवरिया सदर पहुंचने पर ट्रेन मैनेजर को बैठने के लिए प्लास्टिक की कुर्सी दी गई।

हालांकि, इस व्यवस्था पर भी सवाल उठे कि इतनी लंबी और तेज रफ्तार ट्रेन में ड्यूटी करने वाले कर्मचारी के लिए क्या प्लास्टिक की कुर्सी पर्याप्त है?

कई स्टेशनों पर बढ़ती गई ट्रेन की देरी

कुर्सी की समस्या के कारण ट्रेन की देरी आगे भी यात्रियों को परेशान करती रही। रिपोर्ट के मुताबिक देवरिया सदर में ट्रेन 82 मिनट, सीवान में 74 मिनट, छपरा में 67 मिनट, सोनपुर में 77 मिनट और मुजफ्फरपुर में करीब 78 मिनट की देरी से चल रही थी।

रेलवे ने भी मामले पर दिया जवाब

पूर्वोत्तर रेलवे के CPRO सुमित कुमार के अनुसार मामले को आधिकारिक तौर पर ईस्ट सेंट्रल रेलवे के सामने उठाया गया है। रेलवे ने बताया कि कोच में सीट की व्यवस्था की जिम्मेदारी कैरिज एंड वैगन विभाग की होती है।

इस घटना ने एक अहम सवाल जरूर खड़ा किया है,ट्रेन मैनेजर की ड्यूटी जितनी जिम्मेदारी वाली है, क्या उनकी सुविधाओं और सुरक्षा को भी उतनी ही गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए? रामाशिश दास के कदम ने कम से कम इस मुद्दे को चर्चा में जरूर ला दिया है।

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