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कांवड़ यात्रा खत्म, लेकिन नहीं थमी आस्था की लहर,तीसरे सोमवार पर हरिद्वार में जुटेंगे शिवभक्त

Uttrakhand News: कांवड़ यात्रा का समापन हो चुका है, लेकिन धर्मनगरी हरिद्वार में आस्था का रंग अभी भी पूरी तरह बरकरार है। सावन के तीसरे सोमवार को हरिद्वार में बड़ी संख्या में शिवभक्तों के पहुंचने की उम्मीद है। गंगा स्नान, भगवान शिव का जलाभिषेक और मंदिरों में पूजा-अर्चना के साथ श्रद्धालु आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव लेने पहुंचेंगे। इस बीच निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज की 22 घंटे की साधना श्रद्धालुओं के बीच खास आकर्षण बनी हुई है।

दक्षिण काली मंदिर में चल रही कठिन साधना

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दक्षिण काली मंदिर स्थित आश्रम में पूज्य गुरुदेव स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज की कठोर साधना चल रही है। साधना के दौरान उनका मौन, संयम और भगवान शिव के प्रति समर्पण श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित कर रहा है। बड़ी संख्या में भक्त उनके दर्शन और आशीर्वाद की इच्छा लेकर आश्रम पहुंच रहे हैं।

श्रद्धालुओं के बीच इस साधना को लेकर खास उत्सुकता देखी जा रही है। लोगों का मानना है कि सावन के पवित्र महीने में शिव आराधना और साधना का विशेष महत्व होता है। ऐसे में गुरुजी की कठिन साधना भक्तों के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा का केंद्र बन गई है।

 गंगा स्नान और जलाभिषेक के लिए उमड़ेगी भीड़

सावन के तीसरे सोमवार को हरिद्वार के गंगा घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने की संभावना है। भक्त मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाने के बाद भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से धर्मनगरी का माहौल भक्तिमय होने की उम्मीद है।

कांवड़ यात्रा के दौरान हरिद्वार में जिस तरह शिवभक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली थी, उसके बाद अब तीसरे सोमवार पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। कई भक्त गंगा स्नान के साथ धार्मिक स्थलों के दर्शन और संत-महात्माओं का आशीर्वाद लेने को भी अपनी यात्रा का हिस्सा बना रहे हैं।

 साधना ने बढ़ाया आध्यात्मिक आकर्षण

स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज की 22 घंटे की साधना इस समय श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। कठिन तप, अनुशासन और शिव भक्ति के प्रति उनका समर्पण लोगों को आध्यात्मिक रूप से प्रेरित कर रहा है। सावन के तीसरे सोमवार पर हरिद्वार पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह साधना और दर्शन यात्रा का विशेष अनुभव बन सकता है।

कांवड़ यात्रा भले ही समाप्त हो गई हो, लेकिन हरिद्वार में सावन की आस्था लगातार बनी हुई है। तीसरे सोमवार को गंगा स्नान, शिव पूजा और संतों के दर्शन के साथ धर्मनगरी एक बार फिर भक्तिभाव से सराबोर नजर आने की उम्मीद है

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