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कश्मीर से आई दिल छू लेने वाली कहानी: विधवा ने पति की निशानी दान कर पेश की इंसानियत की मिसाल

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Viral Video: कश्मीर की एक विधवा महिला ने अपने पति की याद में संभालकर रखा सोना ईरान के जरूरतमंद लोगों के लिए दान कर दिया। भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। जिसे लोग काफ़ी पसंद कर रहे हैं !कश्मीर में सिर्फ़ एक औरत नहीं बल्कि और भी बहुत लोग उए नेक काम करने के लिए आगे आ रहे हैं ,जहाँ नक़दी गहने और कई सामान ईरान की राहत कि लिए दान कर रहे हैं!

कश्मीर की महिला की मिसाल इंसानियत के नाम पर पति की याद का सोना दान

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मुश्किल समय में सामने आई एक दिल छू लेने वाली कहानी,जिसने लोगों को भावुक कर दिया जम्मू-कश्मीर से एक ऐसी भावुक कर देने वाली कहानी सामने आई है, जिसने इंसानियत और एकजुटता की नई मिसाल पेश की है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में कश्मीर की एक विधवा महिला अपने पति की याद में संभालकर रखा सोना दान करती हुई नजर आ रही है। इस दौरान वह भावुक होकर रो भी पड़ती है, जिसे देखकर हर कोई भावुक हो गया।

इंसानियत के नाम पर पति की याद का सोना दान

हाल के दिनों में ईरान को लेकर कई तरह की खबरें और दावे सामने आए हैं, जिनमें वहां बड़े नुकसान और जनहानि की बात कही जा रही है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अलग-अलग स्रोतों पर निर्भर करती है, लेकिन मानवीय आधार पर भारत के कई हिस्सों में लोगों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया है।इसी कड़ी में कश्मीर की इस महिला का कदम खास बन जाता है। बताया जा रहा है कि उनके पति का निधन करीब 28 साल पहले हो गया था। उनकी याद में महिला ने कुछ सोना संभालकर रखा था, जिसे उन्होंने अब ईरान के जरूरतमंद लोगों के लिए दान कर दिया।

इमोशनल हो के छलके आँसू

वीडियो में महिला की आंखों में आंसू साफ दिखाई देते हैं, लेकिन साथ ही उनके चेहरे पर एक सुकून भी झलकता है। जैसे वह अपने पति की याद को एक नेक काम के जरिए जिंदा रख रही हों। इस वीडियो को सोशल मीडिया पर काफी सराहा जा रहा है और लोग महिला की संवेदनशीलता और साहस की तारीफ कर रहे हैं।

कश्मीर में दान की लहर

सिर्फ यही महिला नहीं, बल्कि कश्मीर के कई इलाकों में लोग बढ़-चढ़कर दान कर रहे हैं। खासतौर पर बडगाम और शिया बहुल क्षेत्रों में मस्जिदों के बाहर दान शिविर लगाए गए हैं। यहां लोग नकदी, सोना, घरेलू सामान, यहां तक कि पशुधन तक दान कर रहे हैं। इन कैंपों में हर उम्र के लोग शामिल हैं। महिलाएं बच्चे और बुजुर्ग सभी अपनी क्षमता के अनुसार योगदान दे रहे हैं। ईद के मौके पर भी घर-घर जाकर लोगों से मदद की अपील की गई जिससे इस मुहिम को और मजबूती मिली।

 

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