Puja Muhurat: 7 सितंबर 2026, सोमवार को अजा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। इसे कुछ स्थानों पर अन्नदा एकादशी भी कहा जाता है। खास बात यह है कि इसी दिन शाम को बछ बारस की पूजा भी होगी। इसकी वजह तिथि और पूजा काल से जुड़ी परंपरा है।
सूर्योदय के समय एकादशी तिथि मौजूद रहेगी। इसलिए उदया तिथि के आधार पर इसी दिन अजा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। एकादशी तिथि शाम 5:03 बजे समाप्त होगी और इसके बाद द्वादशी शुरू हो जाएगी।
बछ बारस की पूजा 7 सितंबर को ही क्यों?
बछ बारस को कई क्षेत्रों में गोवत्स द्वादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस पर्व पर गाय और बछड़े की पूजा करने की परंपरा है। कई स्थानों पर माताएं संतान के अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से यह व्रत-पूजन करती हैं।
इस पर्व की पूजा शाम के समय प्रदोष काल में की जाती है। इसलिए इसकी तारीख तय करने में प्रदोष काल के दौरान मौजूद द्वादशी तिथि को महत्व दिया जाता है।
शाम 5:03 बजे शुरू होगी और शाम के प्रदोष काल में मौजूद रहेगी। वहीं 8 सितंबर को द्वादशी दोपहर 2:42 बजे ही समाप्त हो जाएगी। यानी 8 सितंबर के प्रदोष काल में द्वादशी नहीं होगी। इसी कारण बछ बारस की पूजा 7 सितंबर की शाम को की जाएगी।
अजा एकादशी का पूजा-व्रत
धार्मिक मान्यता के अनुसार अजा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है। श्रद्धालु स्नान के बाद व्रत का संकल्प लेकर भगवान विष्णु को पीले फूल, फल, मिठाई और तुलसी अर्पित कर सकते हैं। धूप-दीप जलाकर विष्णु सहस्रनाम या व्रत कथा का पाठ और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप किया जाता है।
व्रत रखने वाले लोग परंपरा के अनुसार अनाज और चावल का सेवन नहीं करते। फल, दूध, मखाना और साबूदाना जैसी व्रत सामग्री ली जाती है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर कठिन उपवास से बचना बेहतर है।
बछ बारस 2026 पूजा मुहूर्त
7 सितंबर को बछ बारस की पूजा के लिए प्रदोष काल शाम 6:36 बजे से रात 8:53 बजे तक रहेगा। कुल पूजा अवधि 2 घंटे 17 मिनट की होगी।
इस दौरान परंपरा के अनुसार गाय और बछड़े का पूजन, तिलक और फूल अर्पित किए जा सकते हैं। उपलब्धता न होने पर कुछ लोग घर में तस्वीर या प्रतीकात्मक प्रतिमा रखकर पूजा करते हैं।