Kerosene distribution: दुनिया भर में जारी ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति (Energy Supply) पर गहरा संकट मंडरा रहा है। भारत में भी एलपीजी (LPG) की कमी की आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने रविवार को एक ऐतिहासिक और बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने घरेलू उपयोग के लिए केरोसिन (मिट्टी का तेल) के वितरण नियमों में बड़ी ढील देने का ऐलान किया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोलियम सुरक्षा और लाइसेंसिंग नियमों में अस्थायी रूप से छूट दी गई है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य सप्लाई चेन में आने वाली बाधाओं को दूर करना और देश के 21 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में खाना पकाने और रोशनी के लिए वैकल्पिक ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
पेट्रोल पंपों पर बनेगा केरोसिन का नया केंद्र
सरकार द्वारा नियमों में किए गए बदलावों के तहत अब सार्वजनिक क्षेत्र की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (जैसे IOCL, BPCL, HPCL) द्वारा संचालित पेट्रोल पंपों को केरोसिन स्टोर करने और वितरित करने की अनुमति दी गई है। योजना के अनुसार, प्रत्येक जिले में अधिकतम दो पेट्रोल पंपों को इस कार्य के लिए नामांकित (Nominate) किया जा सकता है। इन चुनिंदा पंपों पर 5000 लीटर तक केरोसिन तेल का स्टॉक रखने की अनुमति होगी। इससे आम जनता को एलपीजी की कमी की स्थिति में भटकना नहीं पड़ेगा और वे आसानी से अपने नजदीकी अधिकृत पंप से केरोसिन प्राप्त कर सकेंगे।
लाइसेंसिंग नियमों में छूट और वितरण प्रणाली
चुनौतीपूर्ण वैश्विक हालातों को देखते हुए सरकार ने ‘सप्लाई चेन’ को तेज करने के लिए पेट्रोलियम नियम 2002 के लाइसेंसिंग प्रावधानों से डीलरों और वाहनों को मुक्त कर दिया है। इसका अर्थ है कि केरोसिन के भंडारण, परिवहन और वितरण से जुड़े वाहनों को अब लंबी कागजी प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना होगा। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था उन 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए विशेष रूप से की गई है जो वर्तमान में ‘PDS सुपीरियर केरोसिन ऑयल’ मुक्त हैं। यह एक अस्थायी आवंटन है ताकि युद्ध के कारण उत्पन्न ऊर्जा संकट का असर आम आदमी की रसोई पर न पड़े।
दुरुपयोग रोकने के लिए सख्त निर्देश
नियमों में ढील देने के साथ ही सरकार ने कड़ी चेतावनी भी जारी की है। अधिसूचना में साफ कहा गया है कि केरोसिन के इस अस्थायी वितरण का किसी भी स्तर पर दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस तेल का उपयोग केवल और केवल घरेलू स्तर पर खाना पकाने और रोशनी (Lighting) के उद्देश्य से ही किया जा सकेगा। इसका व्यावसायिक उपयोग या अवैध कालाबाजारी रोकने के लिए निगरानी तंत्र को भी सक्रिय किया गया है। सरकार की यह पहल दर्शाती है कि वह वैश्विक युद्ध के दौर में देश की ऊर्जा सुरक्षा और गरीब परिवारों की जरूरतों को लेकर पूरी तरह सजग है।
