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Supreme Court का बड़ा आदेश! अब VLTD और पैनिक बटन जरूरी, तभी मिलेगा वाहन फिटनेस सर्टिफिकेट

Supreme Court Strict On Road Safety: नई दिल्ली में सड़क सुरक्षा से जुड़े एक बड़े मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को कड़े निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने साफ कहा है कि अब सार्वजनिक सेवा वाहनों में सुरक्षा नियमों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। न्यायालय ने आदेश दिया है कि सभी सार्वजनिक वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस यानी वीएलटीडी और पैनिक बटन लगाना जरूरी होगा। बिना इसके अब फिटनेस सर्टिफिकेट और परमिट जारी नहीं किए जाएंगे।

पुराने वाहनों में भी लगेंगे सुरक्षा उपकरण

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 31 दिसंबर 2018 तक रजिस्टर्ड पुराने वाहनों में भी वीएलटीडी और पैनिक बटन लगाना अनिवार्य किया जाए। अदालत ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि तय समय के अंदर इन उपकरणों की जांच और सत्यापन पूरा किया जाए।।इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति J.B. Pardiwala और K.V. Viswanathan की खंडपीठ ने की। सड़क सुरक्षा कार्यकर्ता केसी जैन और अदालत द्वारा नियुक्त अमाइकस क्यूरी गौरव अग्रवाल ने भी कोर्ट में अपनी बात रखी।

99 प्रतिशत वाहन अब भी नियमों से बाहर

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 के तहत कई साल पहले ही सार्वजनिक वाहनों में वीएलटीडी और पैनिक बटन जरूरी कर दिए गए थे। इसके बावजूद देश के 99 प्रतिशत से ज्यादा वाहन अभी भी इन नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। सड़क परिवहन मंत्रालय ने दिसंबर 2025 में सभी राज्यों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। एक जनवरी 2026 से वाहन पोर्टल पर वीएलटीडी की जांच भी जरूरी कर दी गई थी, लेकिन जमीनी हालात अब भी कमजोर हैं।

स्पीड गवर्नर को लेकर भी चिंता

कोर्ट में यह मुद्दा भी उठा कि एक अक्टूबर 2015 के बाद बने सभी परिवहन वाहनों में स्पीड लिमिटिंग डिवाइस यानी एसएलडी लगाना जरूरी है। इसके बावजूद देश के करोड़ों वाहनों में यह सिस्टम नहीं लगाया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2.18 करोड़ परिवहन वाहनों में से केवल 10.70 लाख वाहनों में ही एसएलडी मौजूद है। अदालत ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए केंद्र सरकार को वाहन निर्माताओं पर सख्त नियम लागू करने के निर्देश दिए हैं।

राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड पर भी नाराजगी

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड के गठन में देरी पर भी नाराजगी जताई। अदालत को बताया गया कि छह साल बाद भी यह बोर्ड पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाया है। न अध्यक्ष की नियुक्ति हुई है और न ही सदस्य नियुक्त किए गए हैं।
कोर्ट ने केंद्र सरकार को अंतिम मौका देते हुए तीन महीने के अंदर बोर्ड को पूरी तरह सक्रिय करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 3 सितंबर 2026 को होगी।

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