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90s की सुनहरी यादें: संजू की पेंसिल से सोनपरी की जादुई छड़ी तक, जब टीवी ही थी हमारी पूरी दुनिया

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90s Indian TV shows: 90 का दशक सिर्फ एक समय नहीं था, बल्कि भावनाओं, कल्पनाओं और मासूम सपनों का दौर था। उस वक्त बच्चों की दुनिया टीवी के इर्द-गिर्द घूमती थी। न मोबाइल थे, न इंटरनेट और न ही सोशल मीडिया का शोर। फिर भी हर शाम रंगीन लगती थी, क्योंकि टीवी पर आने वाले किरदार हमारे दोस्त जैसे बन चुके थे।स्कूल से लौटकर जल्दी-जल्दी होमवर्क खत्म करना और फिर टीवी के सामने बैठ जाना, यही दिन का सबसे खास पल होता था। उन सीरियल्स और फिल्मों ने सिर्फ मनोरंजन नहीं किया, बल्कि बच्चों के मन में कई अनोखी ख्वाहिशें भी जगा दीं। आज जब हम बड़े हो चुके हैं, तो उन मासूम इच्छाओं को याद करके चेहरे पर अपने आप मुस्कान आ जाती है। आइए याद करते हैं बचपन की वो 5 अजीब लेकिन प्यारी ख्वाहिशें, जिन्हें 90s के लगभग हर बच्चे ने महसूस किया था।

मिस्टर इंडिया की गायब करने वाली घड़ी

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अनिल कपूर की फिल्म *मिस्टर इंडिया* देखने के बाद हर बच्चे का सपना था कि उसके पास भी वो जादुई घड़ी हो जाए, जिससे वह गायब हो सके। किसी को स्कूल की डांट से बचना था, तो कोई चुपके से मिठाई खाने का सपना देखता था। बच्चों की कल्पनाओं में यह घड़ी किसी सुपरपावर से कम नहीं थी।

संजू की जादुई पेंसिल

शाका लाका बूम बूम का नाम सुनते ही आज भी बचपन ताजा हो जाता है। संजू की जादुई पेंसिल ने हर बच्चे को दीवाना बना दिया था। बच्चे अपनी साधारण पेंसिल से साइकिल, चॉकलेट या खिलौनों की ड्रॉइंग बनाकर उम्मीद करते थे कि शायद वो सच में बाहर आ जाए। यह कल्पना बच्चों के लिए किसी जादू से कम नहीं थी।

शक्तिमान की तरह उड़ने का सपना

रविवार की दोपहर और शक्तिमान यह कॉम्बिनेशन हर घर में खास होता था। शक्तिमान को गोल-गोल घूमकर उड़ते देख बच्चे भी वैसा ही करने की कोशिश करते थे। कई बार चक्कर खाकर गिर पड़ते, लेकिन फिर भी सुपरहीरो बनने का जोश कम नहीं होता था।

मोगली बनकर जानवरों से दोस्ती

द जंगल बुक का मोगली बच्चों का पसंदीदा किरदार था। जंगल में जानवरों के साथ रहना, उनसे बातें करना और रोमांच से भरी जिंदगी जीना बच्चों को बेहद आकर्षित करता था। हर बच्चा चाहता था कि काश वह भी जानवरों की भाषा समझ पाता।

सोनपरी का जादू

“इत्तु बित्तु झिम पतूता…” यह मंत्र सुनते ही बच्चों की आंखों में चमक आ जाती थी। सोनपरी और अल्तू अंकल बच्चों के लिए किसी जादुई दुनिया का हिस्सा थे। खासकर मुश्किल होमवर्क या डांट से बचने के लिए बच्चे चाहते थे कि काश सोनपरी सच में आ जाए और सब आसान कर दे।आज भले ही ये ख्वाहिशें बचकानी लगती हों, लेकिन इन्हीं छोटी-छोटी कल्पनाओं ने बचपन को खूबसूरत बनाया था। 90s की यही मासूमियत आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है।

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