- विज्ञापन -
Home Health Health Update: डिजिटल हेल्थ की नई पहल,नवजातों की बीमारी पहचानने में AI...

Health Update: डिजिटल हेल्थ की नई पहल,नवजातों की बीमारी पहचानने में AI आगे

Health Update: चिकित्सा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है और अब यह नवजात शिशुओं की सेहत की निगरानी में भी बड़ी भूमिका निभाने लगा है। इसी दिशा में लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के बाल रोग विभाग ने एक एआई आधारित मोबाइल एप विकसित किया है,

शुरुआती पहचान करने में मदद करेगा

- विज्ञापन -

संस्थान के निदेशक C. M. Singh के अनुसार नवजात शिशुओं में पीलिया (जॉन्डिस) आम समस्या होती है, लेकिन कई मामलों में यह गंभीर लिवर रोग बिलियरी एट्रेसिया का संकेत भी हो सकता है। इस बीमारी में लिवर से पित्त के बहाव में रुकावट आ जाती है, जिससे शिशु की स्थिति तेजी से गंभीर हो सकती है। समय रहते पहचान और उपचार न मिलने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकती है।

स्टूल की फोटो से करेगा बीमारी का संकेत

यह मोबाइल एप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इमेज प्रोसेसिंग तकनीक पर आधारित है। इसमें माता-पिता या स्वास्थ्यकर्मी नवजात शिशु के मल (स्टूल) की फोटो अपलोड करते हैं। इसके बाद एप रंग और पैटर्न का विश्लेषण करके संभावित लिवर संबंधी समस्या की चेतावनी देता है और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह देता है।

शुरुआती पहचान से बढ़ेगी उपचार की सफलता

संस्थान के पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट Piyush Upadhyay ने बताया कि बिलियरी एट्रेसिया जैसी बीमारी में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि जीवन के पहले 6 से 8 सप्ताह के भीतर बीमारी की पहचान हो जाए तो सर्जरी के माध्यम से शिशु का सफल उपचार संभव है। यह एआई आधारित एप उसी महत्वपूर्ण समय में चेतावनी देकर नवजातों की जान बचाने में सहायक हो सकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी उपयोगी तकनीक

यह एप खास तौर पर उन क्षेत्रों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। मोबाइल फोन के बढ़ते उपयोग के कारण यह तकनीक गांवों तक आसानी से पहुंच सकती है। आशा कार्यकर्ता और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के कर्मचारी भी इस एप का उपयोग कर सकेंगे, जिससे नवजात शिशुओं की समय पर स्क्रीनिंग संभव होगी।

 

- विज्ञापन -
Exit mobile version