Scrub Typhus Symptoms: पूर्वी उत्तर प्रदेश में स्क्रब टाइफस के मामले बढ़ने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। वाराणसी के सर सुंदरलाल अस्पताल, बीएचयू में पिछले एक सप्ताह के दौरान 12 मरीज भर्ती हुए हैं। इनमें से एक मरीज को इलाज के बाद डिस्चार्ज किया जा चुका है। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए जनरल मेडिसिन विभाग जल्द ही एडवाइजरी जारी करने की तैयारी कर रहा है।
अस्पताल के एमएस डॉ. पुनीत के मुताबिक, मरीजों की संख्या पर लगातार नजर रखी जा रही है। बीएचयू के आंकड़ों के अनुसार 2025 में 2,790 लोगों की जांच में 493 मरीज पॉजिटिव पाए गए थे। वहीं 2024 में जून से दिसंबर के बीच 2,512 संदिग्ध मरीजों की जांच में 481 मामलों की पुष्टि हुई थी।
कई राज्यों से पहुंच रहे मरीज
बीएचयू में पूर्वांचल के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और झारखंड से भी मरीज इलाज के लिए पहुंचे हैं। माइक्रोबायोलॉजी विभाग के शोध में बीमारी से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आए हैं। डॉक्टरों ने अपनी ओपीडी में मरीजों को बीमारी और बचाव के प्रति जागरूक करना शुरू कर दिया है।
वाराणसी में एक बच्ची की मौत के बाद अस्पताल पर लापरवाही के आरोप लगाए गए थे। इसके बाद सीएमओ ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की। टीम में नोडल अधिकारी डॉ. अजय कुमार सिंह, जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. शिशिर कुमार और जिला मलेरिया अधिकारी शरतचंद्र पांडेय शामिल हैं।
कैसे फैलता है स्क्रब टाइफस?
स्क्रब टाइफस ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी नामक जीवाणु से होने वाली बीमारी है। यह संक्रमित चिगर माइट यानी छोटे लाल कीट के काटने से फैलती है। खेतों, झाड़ियों और घास-फूस वाले इलाकों में रहने या काम करने वाले लोगों में इसका जोखिम अधिक हो सकता है।
इसके शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द और बदन दर्द शामिल हैं। ये लक्षण डेंगू या सामान्य वायरल फीवर जैसे लग सकते हैं, जिससे बीमारी की पहचान में देरी हो सकती है।
समय पर जांच और इलाज जरूरी
अब IgM ELISA टेस्ट जैसी जांच उपलब्ध होने से बीमारी की पहचान में मदद मिल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक बुखार रहने और संबंधित जोखिम होने पर डॉक्टर की सलाह से स्क्रब टाइफस की जांच पर भी विचार किया जाना चाहिए।
बीएचयू में गंभीर मरीजों के इलाज के लिए उपलब्ध वेंटिलेटर और जिला अस्पतालों में संक्रामक रोगों के लिए अलग वार्ड की कमी भी चिंता का विषय बनी हुई है। ऐसे में बीमारी की समय पर पहचान, उचित उपचार और जागरूकता बेहद जरूरी है।
