World Autism Day 2026: हर साल की तरह आज, 2 अप्रैल 2026 को दुनिया भर में ‘विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस’ मनाया जा रहा है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य समाज में ऑटिज्म के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना और इस न्यूरोलॉजिकल स्थिति के बारे में फैली भ्रांतियों को दूर करना है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि ऑटिज्म कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक ‘डिसऑर्डर’ (विकार) है। इसे जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता, लेकिन सही समय पर पहचान और उचित थेरेपी के माध्यम से इसे प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। इस विकार से पीड़ित बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सबसे ज़रूरी है
ऑटिज्म क्या है और इसे ‘स्पेक्ट्रम’ क्यों कहते हैं?
ऑटिज्म एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जो मस्तिष्क के विकास से जुड़ी एक विशेष स्थिति है। इसे ‘ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर’ (ASD) इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण और गंभीरता हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकती है। यह आमतौर पर बचपन के शुरुआती वर्षों में ही दिखाई देने लगता है और बच्चे के व्यवहार, बातचीत करने के तरीके और सामाजिक संबंधों को प्रभावित करता है।
बच्चों में दिखने वाले इन शुरुआती लक्षणों की पहचान
ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों में कुछ खास व्यवहार देखे जा सकते हैं, जिन्हें पहचानना माता-पिता के लिए बेहद जरूरी है। ऐसे बच्चों को दूसरों से बात करने या अपनी भावनाएं व्यक्त करने में कठिनाई होती है। अक्सर ये बच्चे ‘आई कॉन्टैक्ट’ (आँखों में आँखें डालकर बात करना) करने से कतराते हैं। इसके अलावा, वे एक ही तरह के व्यवहार को बार-बार दोहरा सकते हैं, जैसे लगातार हाथ हिलाना या किसी एक विशेष वस्तु में अत्यधिक रुचि दिखाना। उन्हें दूसरे बच्चों के साथ घुलने-मिलने या दोस्ती करने में भी मुश्किल महसूस होती है।
क्या हैं इसके कारण और रोकथाम
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ऑटिज्म का सटीक कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन इसके पीछे जेनेटिक (अनुवांशिक) और पर्यावरणीय कारक जिम्मेदार माने जाते हैं। कुछ मामलों में गर्भावस्था के दौरान संक्रमण, पोषण की कमी या माता-पिता की अधिक उम्र भी भूमिका निभा सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ऑटिज्म को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन गर्भावस्था के दौरान संतुलित आहार, नियमित जांच और शराब व धूम्रपान जैसे हानिकारक पदार्थों से दूरी बनाकर जोखिम को कम किया जा सकता है। यह किसी की खराब परवरिश का परिणाम नहीं है, बल्कि एक जैविक स्थिति है।
अभिभावकों के लिए विशेषज्ञ सलाह
विशेषज्ञों का मानना है कि हालांकि ऑटिज्म का पूर्ण इलाज संभव नहीं है, लेकिन सही ‘स्पीच थेरेपी’, ‘बिहेवियरल थेरेपी’ और विशेष शिक्षा के माध्यम से बच्चे के विकास को बेहतर बनाया जा सकता है। माता-पिता को सलाह दी जाती है कि वे लक्षणों को नजरअंदाज न करें और जल्द से जल्द विशेषज्ञों से संपर्क करें। इस विकार से जूझ रहे बच्चों को केवल एक डॉक्टर की नहीं, बल्कि एक ऐसे समाज की जरूरत है जो उन्हें बिना किसी भेदभाव के स्वीकार करे और उनके विकास में सहयोगी बने।
