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गणपति पूजा की खुशी मातम में बदली 31 साल की रागिनी की मौत से परिवार में मचा कोहराम

Bihar news:बेगूसराय की रहने वाली 31 वर्षीय रागिनी कुमारी की महाराष्ट्र के पुणे में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। रागिनी अपने सॉफ्टवेयर इंजीनियर पति धीरज कुमार राय और दो बच्चों के साथ पुणे में रहती थीं। घटना के बाद मायके पक्ष ने पति पर गंभीर आरोप लगाए हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।

गणपति पूजा के बाद बदल गया माहौल

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परिजनों के मुताबिक 14 सितंबर को रागिनी के घर गणपति पूजा हुई थी। पूजा के दौरान परिवार की तस्वीर भी सामने आई है, जिसमें सभी सामान्य और खुश नजर आ रहे हैं। लेकिन कुछ ही घंटों बाद हालात बदल गए। रात करीब 8:30 बजे पुणे की अविला सोसाइटी स्थित फ्लैट से रागिनी का शव बरामद हुआ।

घटना की जानकारी मिलने के बाद रागिनी के मायके वाले पुणे पहुंचे। उनके पिता रामकिशोर मिश्रा ने पुलिस को आवेदन देकर मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की। परिवार की ओर से रागिनी की गर्दन पर नीले और काले निशान होने की बात कही गई है और हत्या की आशंका जताई गई है। इन आरोपों की पुलिस जांच कर रही है।

बीटेक की पढ़ाई के बाद छोड़ी थी नौकरी

रागिनी सेवानिवृत्त सूबेदार रामकिशोर मिश्रा की बेटी थीं। उन्होंने बीटेक की पढ़ाई की थी और शादी से पहले नौकरी भी करती थीं। करीब नौ साल पहले उनकी शादी समस्तीपुर जिले के हसनपुर थाना क्षेत्र के शासन गांव निवासी धीरज कुमार राय से हुई थी। धीरज पुणे में टीसीएस में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम करते हैं।

रागिनी और धीरज के दो बच्चे हैं। इनमें एक आठ साल का बेटा और सात साल की बेटी है। शादी के बाद रागिनी ने नौकरी छोड़ दी थी।

मोबाइल फोन को लेकर भी लगाए गए आरोप

मायके पक्ष ने मोबाइल फोन को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार के अनुसार, रक्षाबंधन पर रागिनी के भाई उत्तम मिश्रा ने उन्हें मोबाइल फोन गिफ्ट किया था। आरोप है कि धीरज ने इसका विरोध किया और फोन अपने पास रख लिया।

रागिनी के भाई गौतम ने पुणे के बावधन थाने में दिए आवेदन में इस घटना को मानसिक प्रताड़ना और मायके से संपर्क सीमित करने के आरोपों से जोड़ा है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

बच्चों के भविष्य को लेकर पंचायत में फैसला

रागिनी का शव पैतृक गांव समस्तीपुर लाया गया, जहां दोनों पक्षों की मौजूदगी में पंचायत हुई। पंचायत में बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने, उनकी पैतृक संपत्ति में हिस्सा सुरक्षित रखने और रागिनी के नाम जमा राशि बच्चों को देने जैसे फैसलों पर सहमति बनी।

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