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Tuesday, July 23, 2024
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Parenting Tips: कूलर-एसी के कारण बिगड़ रही है बच्चों की तबीयत, ऐसे दिलाए राहत

How to care Baby: गर्मी इस समय अपने चरम पर है। हालात ऐसे हैं कि एसी और कूलर के बिना रहना नामुमकिन हो गया है। ऐसे में सबसे बड़ी परेशानी उन लोगों को होती है जिनके घर में छोटे बच्चे हैं, क्योंकि एसी-कूलर की सीधी हवा बच्चों को काफी नुकसान पहुंचाती है। इससे उनकी सेहत खराब होती है। अब परेशानी ये है कि छोटे बच्चों को न तो गर्मी में रखा जा सकता है और न ही कूलर-एसी की सीधी हवा में। अब सवाल ये उठता है कि ऐसे में बच्चों को कैसे सुलाएं? अगर आप भी ऐसी ही परेशानी का सामना कर रहे हैं तो ये टिप्स आपके काफी काम आएंगे।

एसी का तापमान इतना होना चाहिए

अगर आप छोटे बच्चे को एसी में सुलाना चाहते हैं तो आपको एसी के तापमान का खास ख्याल रखने की जरूरत है। कितनी भी गर्मी हो, एसी का तापमान 23 से 25 डिग्री के बीच रखना चाहिए। इससे बच्चों पर ठंडे तापमान का असर नहीं होगा और उन्हें ठंड भी नहीं लगेगी। अगर आप बच्चे को कूलर में सुला रहे हैं तो कोशिश करें कि उसका बिस्तर कूलर की हवा के ठीक सामने न हो। इसके लिए कमरे में पंखा चला दें, ताकि कूलर से आने वाली हवा घूमती रहे और ज़्यादा ठंड न लगे।

आप अपने बच्चे को चादर ओढ़ाकर भी सुरक्षित रख सकते हैं

अगर बच्चा कूलर या एसी के ठीक सामने सोने की जिद कर रहा है, तो उसे पतली चादर ओढ़ा दें। इससे एसी या कूलर से आने वाली सीधी हवा उसके शरीर को नहीं छू पाएगी। वह ठंड से बचा रहेगा।

उन्हें पूरे कपड़े पहनाना भी कारगर है

बच्चे थोड़े शरारती होते हैं। हो सकता है कि वे सोते समय चादर हटा दें, जिससे एसी या कूलर से आने वाली हवा उन्हें नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे में उन्हें हमेशा पूरी बाजू के कपड़े पहनाएं, ताकि ठंडी हवा उनके शरीर के सीधे संपर्क में न आए और उन्हें नुकसान न पहुंचाए। दरअसल, एसी या कूलर से आने वाली सीधी हवा बच्चों में सर्दी-खांसी जैसी समस्या पैदा कर सकती है। ध्यान रखें कि बच्चों को पूरी बाजू के कपड़े पहनाएं, लेकिन वे सूती कपड़े के होने चाहिए, ताकि उन्हें गर्मी न लगे।

त्वचा का ख्याल रखने की भी जरूरत

कूलर से निकलने वाली हवा में नमी होती है, जबकि एसी से निकलने वाली हवा सूखी होती है। ऐसे में बच्चे को सुलाने से पहले उसकी त्वचा पर तेल या मॉइश्चराइजर जरूर लगाना चाहिए। बच्चे को एसी में सुलाने से पहले यह तरीका अपनाना बहुत जरूरी है, क्योंकि बच्चों की त्वचा बहुत नाजुक होती है।

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