Uttar Pradesh Politics: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की भूमिका और कामकाज को लेकर एक बार फिर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा कि अब देश को जवाब चाहिए। अपने पोस्ट में उन्होंने ‘मुंह नुचुआ’ और ‘चुनाव मुचुआ’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया और चुनाव आयोग के इस्तीफे की मांग की।
अखिलेश यादव ने लिखा कि ‘मुँह नुचुआ’ तो सुना था, अब ‘चुनाव मुचुआ’ भी आ गए हैं। उन्होंने आगे ‘एक देश का एक मत’ का जिक्र करते हुए संबंधित अधिकारियों से त्यागपत्र देने की मांग रखी। साथ ही उन्होंने कहा कि बाकी बातों का मतलब समझने के लिए जागरूक जनता और नई पीढ़ी काफी समझदार है।
2027 यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर भी सवाल
अखिलेश यादव इससे पहले भी निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने मांग की थी कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की देखरेख में नहीं कराया जाना चाहिए। उनका आरोप रहा है कि आयोग के कुछ फैसलों और कामकाज को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।
अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग के व्यवहार को लोकतंत्र के लिए नुकसानदायक बताते हुए अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। हालांकि, उनके इन आरोपों को उनके राजनीतिक बयान और आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
2022 के चुनाव को लेकर भी लगाया था आरोप
सपा प्रमुख ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 का जिक्र करते हुए आरोप लगाया था कि कुछ इलाकों में सपा समर्थक मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए। उन्होंने दावा किया था कि इस संबंध में शपथपत्र के साथ शिकायत भी की गई थी, लेकिन संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने निर्वाचन आयोग के भीतर अधिकारियों की कथित असहमति का भी मुद्दा उठाया। अखिलेश के मुताबिक, कुछ चुनाव आयुक्तों ने आयोग के फैसलों पर आपत्ति दर्ज कराई थी। उन्होंने इसे चुनावी संस्था की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जोड़ते हुए चिंता जताई।
सोशल मीडिया पोस्ट से फिर गरमाई सियासत
अखिलेश यादव के ताजा बयान के बाद चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक बहस फिर चर्चा में आ गई है। उनके बयान में इस्तेमाल किए गए ‘चुनाव मुचुआ’ शब्द ने भी ध्यान खींचा है। आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनाव आयोग की भूमिका और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण राजनीतिक विषय बने रह सकते हैं।
