PM Narendra Modi Diet Plan: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी व्यस्त दिनचर्या के बावजूद फिटनेस और खान-पान को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं। सार्वजनिक बातचीत में वह कई बार अपने भोजन और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़ी बातें साझा कर चुके हैं। हालांकि, प्रधानमंत्री ने यह भी कहा है कि उनकी कोई तय डाइट नहीं है और उनका खाना उपलब्धता व पसंद के अनुसार बदलता रहता है।
उनके बताए खान-पान में सादा, शाकाहारी और कम मसाले वाला भोजन प्रमुखता से नजर आता है। मखाना, मिलेट्स, मौसमी फल, सब्जियां और दाल जैसे विकल्प उनकी बताई गई पसंद में शामिल रहे हैं।
मखाना है पसंदीदा स्नैक
मखाना यानी कमल के बीज भारतीय खान-पान का पुराना हिस्सा हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बताया था कि वह साल में करीब 300 दिन मखाना खाते हैं। इसे हल्का भूनकर स्नैक के तौर पर खाया जा सकता है।हालांकि, मखाना कितना और किस रूप में खाना चाहिए, यह हर व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और रोज की कुल डाइट पर निर्भर करता है।
मिलेट्स को भी देते हैं महत्व
बाजरा, रागी और ज्वार जैसे मिलेट्स को प्रधानमंत्री मोदी कई मौकों पर बढ़ावा देते रहे हैं। ये अनाज भारतीय पारंपरिक भोजन का हिस्सा हैं और इन्हें रोटी, खिचड़ी या दूसरे व्यंजनों में शामिल किया जा सकता है।आजकल संतुलित डाइट में भी लोग गेहूं और चावल के साथ अलग-अलग अनाज शामिल करने की कोशिश करते हैं।
मौसमी फल और हरी सब्जियां
प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों के साथ बातचीत में मौसमी फल खाने की बात कही थी। फल रोज के भोजन में प्राकृतिक मिठास और कई पोषक तत्व जोड़ सकते हैं।
उनके बताए खान-पान में हरी सब्जियां और दालें भी शामिल हैं। सहजन यानी मोरिंगा को लेकर भी प्रधानमंत्री कई बार बात कर चुके हैं। इसे सब्जी, पराठे या अन्य घरेलू व्यंजनों के रूप में खाया जा सकता है।
खिचड़ी जैसा सादा भोजन
खिचड़ी को हल्का और सरल घरेलू भोजन माना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने खान-पान से जुड़ी बातचीत में खिचड़ी का जिक्र किया है। उनके अनुसार भोजन ऐसा होना चाहिए जिसे व्यक्ति अपनी पसंद से आसानी से अपना सके, न कि किसी मजबूरी की तरह।
जंक और तले भोजन से दूरी
स्वस्थ खान-पान की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने बच्चों को जंक फूड और बहुत ज्यादा तला-भुना भोजन कम करने की सलाह दी है। संतुलित भोजन के साथ पर्याप्त पानी, नींद और नियमित शारीरिक गतिविधि भी जरूरी हैं।
ध्यान रखें कि किसी सार्वजनिक व्यक्ति की डाइट को हूबहू अपनाना जरूरी नहीं है। हर व्यक्ति की पोषण संबंधी जरूरत अलग होती है। उम्र, स्वास्थ्य, कामकाज और दिनचर्या के हिसाब से डाइट तय करना ज्यादा बेहतर रहता है।
